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दफा 302 हत्या… 420 धोखाधड़ी, ये सब बदलने वाला है, जानिए सरकार के नए बिल की मंशा

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(शशि कोन्हेर) : लोकसभा में मोदी सरकार ने नया बिल पेश कर दिया है। भारतीय न्याय संहिता बिल 2023 सिर्फ पुराने कानूनों को खत्म करने का काम नहीं करने वाला है, इसके जरिए सिर्फ न्याय देने पर जोर नहीं है। बल्कि इस बिल को अगर ध्यान से देखा जाए तो कई और बड़े परिवर्तन भी होने जा रहे हैं। अभी तक ये कानून नहीं बना है, ऐसे में बदलाव होते हैं या नहीं, अभी स्पष्ट नहीं। लेकिन बिल जो पेश किया गया है, उसमें भी कई ऐसे पहलू हैं जिनके बारे में आपके लिए जानना जरूरी हो जाता है।

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सरकार ऐसा क्या बदलने जा रही है?
ऐसा ही एक पहलू है IPC की धाराओं वाला, जहां पर नंबरों को बदलने का काम कर दिया गया है। उदाहरण के लिए पहले अगर दफा 302 से मतलब हत्या होता था, दफा 420 से धोखाधड़ी रहता था, तो अब बिल के आने के बाद ये बदल जाएगा।

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असल में नए बिल के मुताबिक धारा 302 का मतलब धोखाधड़ी रहने वाला है। पहले आईपीसी के तहत ये धारा तब लगती थी, जब किसी पर मर्डर का चार्ज लगता था। लेकिन अब नए बिल में कहा गया है कि 302 तब लगाई जाएगी जब कोई छीना झपटी करने की कोशिश करेगा, यानी कि स्नैचिंग।

इसी तरह धोखाधड़ी के लिए पहले आईपीसी के तहत धारा 420 लगाई जाती थी। लेकिन नए बिल में इस धारा को ही खत्म करने का काम कर दिया गया है। इसकी जगह कहा गया है कि सेक्शन 316 के तहत ही धोखाधड़ी को शामिल किया जाएगा।

बिना शादी के शारीरिक संबंध पर क्या प्रावधान?
इस कड़ी में बीएनस में शारीरिक संबंध को लेकर भी बड़ी बात बताई गई है। अगर कोई धोखे से या फिर झूठा आश्वासन देकर शादी की बात करता है और उसी के सहारे उसके साथ शरीरिक संबंध बनाने की कोशिश करता है, उस स्थिति में उसे रेप में काउंट नहीं किया जाएगा। लेकिन 10 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान जरूर कर दिया गया है।

इसी कड़ी में गैंग रेप जैसे जघन्य अपराध के लिए नए बिल में कड़ा प्रावधान किया गया है। अब आरोपी को न्यूनतम 20 साल की सजा दी जाएगी, वहीं वो बढ़कर आजीवन भी हो सकती है। इसी तरह अगर कोई किसी नाबालिग के साथ रेप करेगा तो उसे तो सीधे-सीधे फांसी देने का प्रावधान कर दिया गया है। सरकार द्वारा जो बिल पेश किया गया है, उसकी एक खास बात और है।

मानहानी मामले में बदल गई धारा
बिल से सेक्शन 499 को हटा दिया गया है। ये वहीं सेक्शन है जिस वजह से कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मोदी सरनेम में सदस्यता चली गई थी। 499 के तहत कोई भी शख्स अगर बोलने के जरिए , पढ़ने के जरिए, इशारों के जरिए, कहीं छापने के जरिए किसी का अपमान करेगा तो इसे मानहानि माना जाएगा। लेकिन अब जिस नई संहिता का प्रस्ताव रखा जा रहा है उसमें 499 है ही नहीं। इसके अलावा सेक्शन 354 और 354(2) रखा गया है जिसमें कहा गया है कि अगर किसी पर मानहानि का केस लगता है तो उसे दो साल तक की सजा हो सकती है। वहीं कुछ लोगों को कम्युनिटी सर्विस के लिए भी भेजा जा सकता है।

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नए बिल में एक बड़ा पहलू मॉब लिंचिंग वाला भी रहा है। नए कानून के पेश होने के बाद अब मॉब लिंचिंग में भी सजा का प्रावधान किया जाएगा। मॉब लिंचिंग मामले में अब 7 साल तक की सजा हो सकती है। इसके अलावा नए विधेयक के अनुसार अगर जुर्म किसी भी इलाके में हुआ हो तो देश के किसी भी हिस्से में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। वहीं अगर सरकारी कर्मचारी के खिलाफ कोई मामला दर्ज है, तो 120 दिनों के अंदर अनुमति देना जरूरी है।

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