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छत्तीसगढ़

जन सरोकारों से कोसों दूर चुनावी वादों वाला होलियाना बजट है – अमर अग्रवाल

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(शशि कोनहेर) : बिलासपुर : छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ भाजपा नेता एवं प्रदेश के पूर्व वित्त वाणिज्य कर मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने प्रदेश की भूपेश सरकार के बजट पर टिप्पणी करते हुए कहा कि  बजट के पहले भरोसे के बजट का संदेश जारी कर ढिंढोरा पीटना स्वप्रमाणित है कि सरकार की बुनियादी हकीकत एवं आर्थिक योजनाएं खोखली है।

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छत्तीसगढ़ की जनता 5 सालों से देख रही है किस प्रकार छत्तीसगढ़ को कर्जे के जाल में उलझाया जा रहा है।दरअसल जनता का भरोसा सरकार से पहले उठ चुका है, यह बजट सरकार की विदाई की घोषणा वाला होलीयाना मात्र है, इस बजट की घोषणा का जनसरोकारो से कोई नाता नही,बजट में  चुनावी लुभावने वादे करके एक बार पुनः जनता को भ्रमित करने का काम किया जा रहा है। श्री अमर अग्रवाल ने कहा पिछले चार सालों की तर्ज पर इस वर्ष भी बजट की घोषणाएं विज्ञापन के होर्डिंग्स की शोभा बढ़ाने के अलावा कोई मायने नहीं रखती।

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वैसे भी तीन चौथाई बहुमत के बावजूद जो सरकार में  वित्त मंत्री का चयन नही कर सकती हो उससे वित्तीय प्रबंधन एवम आर्थिक तरक्की की आस रखना सरासर  बेमानी है। 112000 करोड़ से सभी बड़े बजटीय पिटारे में पचासी -नब्बे प्रतिशत कर्जे को बोझ है, प्रति व्यक्ति ऋण भार दिनों दिन बढ़ता जा रहा है,लिए गए के ब्याज में ही लगभग 500 करोड़ पर खर्च किए जा रहे है, लोक कल्याणकारी राज्य के कर्ज विकासात्मक योजनाओं के लिए लक्षित किए जाते हैं, वोट बैंक को लुभाना इस सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता है। अवसंरचना विकास के लिए सरकार की किए गए एमओयू का प्रोडक्शन रेट 33% से भी कम है।

अमर अग्रवाल ने कहा केंद्रीय करो से लगभग  50,000 करोड रुपए प्राप्ति  अनुमानित होना इस बात का प्रमाण है केंद्र प्रवर्तित योजनाओं और केंद्रीय सहायता से ही राज्य की आर्थिक गतिविधियां पिछले 5 वर्षों में संचालित हो रही है, 3 सालों में बाजार से  खुले बाजार से ऋण नहीं दिए जाने के बावजूद 90 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा कर्ज छत्तीसगढ़ में सरकार के द्वारा लिए गए है, बावजूद इसके लोक कल्याण एवं विकासात्मक कार्य ठप्प पड़े हुए हैं।

श्री अमर अग्रवाल ने कहा भूपेश सरकार द्वारा प्रस्तुत किए गए बजट में युवाओं के साथ खुलेआम छल किया जा रहा है। एक तरफ सरकार का दावा है कि बेरोजगारी की दर शून्य से कम है दूसरी ओर लगभग 20 लाख पंजीकृत बेरोजगार हैं जिन्हें सरकार ने 5 वर्षों में बेरोजगारी भत्ता नहीं दिया और अब चुनावी साल में भत्ता देने की बात कर रही है।  बेरोजगारी भत्ता देने के लिए वार्षिक आय का क्राइटेरिया लागू करना सरकार की टालमटोल की मंशा को जाहिर करता है।गैर पंजीकृत बेरोजगारों का सरकार के पास कोई रिकॉर्ड नहीं है।
खेतिहर मजदूर और भूमिहीन श्रमिक को बेरोजगारी भत्ते के लिए लक्षित भी नहीं किया गया है।

अमर अग्रवाल  ने कहा न्याय योजना के नाम पर इस प्रदेश में लूट का खुला खेल चल रहा है। महात्मा गांधी के ग्रामीण औद्योगिक पार्क योजना ग्रामीण क्षेत्र में ही धरातल पर उतर नहीं पाई है अब इसे शहरी क्षेत्रों में भी लागू करने का झूठ परोस दिया गया है। मनरेगा के तहत रोजगार 100 दिन का रोजगार दिलाने में भी सरकार फिसड्डी साबित हुई है ।नए जिलों का निर्माण, पत्रकार सुरक्षा कानून, नियमित भर्ती, कार्मिकों की वेतन विसंगति,  अनियमित और संविदा कर्मियों के नियमतिकरण, केंद्र के बराबर राज्य के कर्मियों को डीए देने की मांग के भरोसे को बजट में भूपेश सरकार ने ठेंगा दिखा दिया है। ओल्ड पेंशन के नाम पर राज्य दो   लाख से ज्यादा शिक्षक एल बी परिवार एवम अन्य कर्मी  प्रथम नियुक्ति तिथि से पेंशन अहर्ता की आस लगाए हुए थे, लेकिन सरकार ने उनके बुढ़ापे के लाठी पर ध्यान देना उचित नहीं समझा। 2 साल के बकाया बोनस के बारे में और शराबबंदी के वादे पर सरकार ने मौन धारण कर लिया है।  सरकार के बजट में राज्य की आय के स्रोतों में वृद्धि करने के लिए कोई योजना नहीं होना बजट के नाम पर की जा रही खानापूर्ति का प्रमाण है। जनता के भरोसे का नारा देकर चुनावी विज्ञापनों का मसौदा बजट में पेश किया  है जो न केवल एकांगी है, इसमे समग्रता की आर्थिक दृष्टि का अभाव है।  बजट में विश्वास तोड़ कर भरोसा जीतने वाली बात की गई है,भूपेश सरकार की चला चली की बेला में  जनता के भरोसे को भूलावा देने वाला निराशाजनक बजट है।

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