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बिलासपुर

EXCLUSIVE : ये रूस यूक्रेन युद्ध में बर्बाद हुए कीव शहर का नहीं…वरन् बिलासपुर के जिला अस्पताल का नजारा है

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(शशि कोन्हेर के साथ जयेन्द्र गोले) : बिलासपुर। इस खबर के साथ दी गई तस्वीरों और वीडियो को जरा ध्यान से देखिए। रविवार दोपहर को आंधी साथ लेकर आई बारिश ने जिला अस्पताल में गंभीर मरीजों के लिए प्राणवायु का इंतजाम करने वाले गैस सिलेंडरों का ऐसा बुरा हाल कर दिया है। इन सिलेंडरों और उनमें भरे गैस की कीमत उन गंभीर मरीजों से पूछिए जिन्हें अस्पताल के बेड पर पड़े-पड़े ऑक्सीजन की बेहद जरूरत हुआ करती है। कोरोना के काल में इन्हीं सिलेंडरों की कमी की वजह से न मालूम कितने हजार मरीजों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। लेकिन जिला अस्पताल के सिविल सर्जन से लेकर प्यून तक को इसकी कोई कीमत पता नहीं है।

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ऐसा इसलिए क्योंकि ना तो सिविल सर्जन को ऑक्सीजन की जरूरत है और ना उनके स्टाफ को। इसीलिए ही गंभीर मरीजों को प्राणवायु देने वाले गैस के सिलेंडर लावारिस हालत में जिला अस्पताल परिसर में पड़े हुए हैं। कायदे से रविवार कीआंधी पानी के तुरंत बाद इन गैस सिलेंडरों का सही सलामत इंतजाम किया जाना था। लेकिन बदइंतजामी के लिए पद्मश्री के दावेदार यहां के डॉक्टरों को इन बेशकीमती या कहें अमूल्य गैस सिलेंडरों की कोई परवाह नहीं है।

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जिस रिपोर्टर (जयेंद्र गोले) ने यह तस्वीरें और वीडियो हमें भेजी हैं। उनसे जब हमने कहा कि आपने इस तरह बेतरतीब पड़े गैस सिलेंडरों की जानकारी अस्पताल के सिविल सर्जन को दी है क्या..? इस पर उस रिपोर्टर का जवाब था कि एक बार अस्पताल में लाइट गोल देखकर इसकी सूचना देने पर सिविल सर्जन डॉ अनिल गुप्ता ने मोबाइल पर ही जिस तरह उन पर भड़ास निकाली थी और जो मुंह में आया वह कहा था। इसके बाद फिर से उन्हें गैस सिलेंडरों की जानकारी देने का मतलब डा अनिल गुप्ता से 2-4 उल्टी-सीधी सुननी ही पड़ेगी। इसलिए रिपोर्टर ने सिविल सर्जन को सूचना देकर फिर से एक बार”आ बैल मुझे मार” कहने की बजाय यह खबर हम तक भेज दी।

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