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इस दीपावली गांवों के दीपों से रोशन होगी “राम लला की नगरी अयोध्या”, हर गांव से भेजे जाएंगे 10 दीपक

(शशि कोन्हेर) : अयोध्या का इस बार का दीपोत्सव बीते पांच बार के दीपोत्सव से ज्यादा दिव्य व भव्य होने वाला है। बीते वर्षों के मुकाबले इस बार वहां जलाए जाने वाले दीयों की संख्या तो ज्यादा होगी ही, विविधता भी देखने को मिलेगी। शासन ने इसके लिए एक विशिष्ट योजना तैयार कर उसका कार्यान्वयन भी शुरू कर दिया है।

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दीयों को बनवाने का सिलसिला शुरू

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योजना के मुताबिक इस बार अयोध्या के दीपोत्सव में प्रदेश के सभी 75 जिले के हर ग्रामसभा की मिट्टी से बने 10-10 दीये जलते नजर आएंगे। दीयों को गांव में बनवाकर इकट्ठा करवाने और उन्हें अयोध्या तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सभी जिलाधिकारियों को सौंपी गई है। दीयों को बनवाने और इकट्ठा करने का सिलसिला शुरू भी हो गया है। अधिकारियों को इसकी जिम्मेदारी भी दे दी गई है।

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जिलाधिकारियों को मिली है हर गांव से 10 दीये बनवाकर अयोध्या भेजने की जिम्मेदारी

गांवों से भेजे जाने वाले दीयों को अयोध्या में इकट्ठा करने के लिए दो नोडल अधिकारी नामित किए गए है। शासन स्तर से सभी जिलाधिकारियों को कहा गया है कि वह दीपोत्सव के लिए बनाए गए दीपदान संयोजक डा. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के चीफ प्राक्टर डा. अजय प्रताप सिंह या अयोध्या के उप निदेशक पर्यटन राजेंद्र प्रसाद यादव को अपने-अपने जिलों में इकट्ठा किए गए दीयों का उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित करें प्रदेश में करीब 90 हजार ग्राम सभाएं हैं।

इन ग्राम सभाओं से कुल नौ लाख दीये इकट्ठा करने की योजना बनाई गई है। 23 अक्टूबर को अयोध्या में आयोजित होने वाले दीपोत्सव को इस बार 14 लाख 50 हजार दीयों से रोशन करने का लक्ष्य शासन की ओर से रखा गया है। गोरखपुर की बात करें तो यहां कुल 1294 ग्राम सभाएं हैं। ऐसे में जिले से प्रति ग्रामसभा 10 दीयों के हिसाब से 12 हजार 940 अयोध्या भेजा जाना है।

हर वर्ष बढ़ता गया दीपोत्सव में दीप प्रज्वलन का लक्ष्य

अयोध्या में इस बार छठा दीपोत्सव मनाया जाना है। इसकी शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2017 से की थी। पहले वर्ष एक लाख 80 हजार दीये अयोध्या के सरयू तट पर जलाए गए थे। 2018 में यह संख्या बढ़कर तीन लाख से ऊपर हो गई। 2019 में साढ़े चार लाख और 2020 में साढ़े छह लाख दीये सरयू तट पर जलाए गए थे। 2021 में नौ लाख दीये जलाकर गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में दीपोत्सव को स्थान दिलाया गया। इस बार शासन की योजना इसे लेकर अपना ही रिकार्ड तोड़ने की है।

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