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चीन से बदला लेने, “वन चाइना पॉलिसी” का त्याग और तिब्बत के मामले में पुनर्विचार करे भारत

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(शशि कोन्हेर) : चीन के द्वारा अरुणाचल प्रदेश लद्दाख और अक्साई चिन के क्षेत्रों को अपने नक्शे में बताए जाने के खिलाफ पूरे देश में जबरदस्त आक्रोश है। सभी का यह मानना है कि चीन एक ऐसा देश है जो भारत के खिलाफ हमेशा से सक्रिय रहा है और अपनी हरकतों से बाज नहीं आता।

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उसके द्वारा भारतीय क्षेत्र को अपने नक्शे में बताने पर भारत सरकार पर वन चाइना पॉलिसी का त्याग करने और स्वतंत्र देश के रूप में पूरी दुनिया को सेमीकंडक्टर मुहैय्या करने वाले ताइवान को मान्यता देने की मांग की जा रही है। ताइवान को मान्यता देने और उससे रिश्ते बनाने के साथ ही तिब्बत को लेकर भी भारत को अपनी नीति में परिवर्तन लाने की पहल करनी चाहिए।

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तिब्बत हमारे देश की सीमा से लगा हुआ एक सार्वभौमिक और स्वतंत्र राष्ट्र था। जिस पर 23
मई 1951 को चीन ने 8 महीने तक लगातार युद्ध के बाद अपने कब्जे में ले लिया।

भारत को इस बारे में अपनी नीति परिवर्तन करने का संकेत चीन को जरूर दे देना चाहिए। वहीं चीन की वन नेशन पॉलिसी का भी परित्याग कर चीन के नेतृत्व को यह इशारा दे देना चाहिए कि भारत अब 1962 के समय जैसा नहीं है।

और यह भी तय है कि उस समय हुई हार से देश की निराशा का मान मर्दन चीन को अच्छी तरह से सबक देने से ही मिलेगा। चीन न केवल भारत की सार्वभौमिकता के खिलाफ हरकतें करने से बाज नहीं आता। वरन वह भारत के पड़ोसियों को भी भारत के खिलाफ उकसाने में कोई कसर नहीं छोड़ना। इसलिए उसके साथ भी वैसा ही बर्ताव होना चाहिए जैसा वह हमारे साथ कर रहा है।

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