रायगढ़

नामांतरण के विवाद में मारपीट, रायगढ़ में कलेक्टोरेट व तहसील कार्यालय बंद….

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(शशि कोन्हेर) : रायगढ़। रायगढ़ तहसील कार्यालय में जमीन के नामांतरण कराने को लेकर विवाद हो गया है। तहसील कार्यालय के दो कर्मचारियों व बीच बचाव करने आए नायब तहसीलदार को वकीलों द्वारा मारा गया। जबकि वकीलों का कहना है कि उनके साथ धक्का मुक्की किया गया उन्होने बीच बचाव किया था। वकील थाने के सामने धरना कर रहे हैं। घटना के विरोध में तहसील समेत जिले के सभी सरकारी कार्यालय बंद हो गए हैं। इधर, पुलिस ने नायब तहसीलदार को पीटने के आरोप में तीन वकीलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
दरअसल, रेलवे बंगला पारा में रहने वाले रामू राम यादव का जमीन नामांतरण होना है। इसे लेकर पहले ही सिविल कोर्ट ने उस जमीन का नामांतरण कराने का फैसला दिया है। इसके बाद ये पूरी प्रक्रिया तहसील कार्यालय से होनी हैं। मगर तहसीलदार सुनील अग्रवाल ने इस पर ये कह दिया है कि वे नामांतरण नहीं करेंगे। ये फैसला ही गलत है। जिसके बाद से ये पूरी प्रक्रिया तहसील कार्यालय में अटकी हुई है।

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शुक्रवार को इस मामले में रामू राम यादव के वकील जितेंद्र शर्मा इस पर किसी बातचीत को लेकर तहसील ऑफिस गए थे। उन्होंने यहां मामले से संबंधित जरूरी दस्तावेजों की जांच की तो पता चला कि तहसीलदार ने गलत डिसीजन लिया है। इस पर वकील जितेंद्र शर्मा ने तहसीलदार सुनील अग्रवाल के सामने आपत्ति जताई थी।
बताया गया कि इसी आपत्ति के बाद से ये विवाद शुरू हुआ है। वकील जितेंद्र शर्मा का कहना है कि जब मैंने तहसीलदार से बात करने की कोशिश की और उनके फैसले को गलत बताया तो तहसीलदार ने उनके साथ बदसलूकी की। उनके साथ धक्कामुक्की की गई। इसके बाद उनके साथी वकील भी वहां पर पहुंच गए तो तहसील कार्यालय के रामप्रसाद सिदार और अखिलेश समेत अन्य लोगों ने हमे मारा पीटा है। वकीलों का आरोप है कि हमारे साथ पहले तो तहसील कार्यालय के लोगों ने मारपीट की है। इसके बाद हमने अपने बचाव में ये सब किया।


इधर, घटना को जो वीडियो सामने आया है। उसमें वकील तहसील कार्यालय के कर्मचारियों को पीटते हुए दिखाई दे रहे हैं।
वहीं इस मामले में तहसील कार्यालय में काम करने वाले कर्मचारियों और राजस्व अधिकारियों का भी अपना पक्ष है। उनका कहना है वकीलों ने हमारे साथ मारपीट की है। हमें पीटा गया है। इसलिए हम कार्यालय बंद कर रहे हैं। साथ ही कलेक्टर कार्यालय को भी बंद कर दिया गया है। तहसील कार्यालय के कर्मचारी भी कलेक्ट्रेट के सामने धरना दे दिया। उन्हें जिले के दूसरे अधिकारी संगठनों का भी समर्थन मिला हुआ है। घटना के बाद अधिकारियों और राजस्व अधिकारियों ने चक्रधरनगर थाने में जाकर घेराव भी कर दिया है। पुलिस की टीम दोनों पक्षों को समझाने में लगी हुई है।

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