छत्तीसगढ़

स्मार्टसिटी कार्य मे अनियमिता की केंद्रीय मंत्री से शिकायत करने भाजपाइयों को, केंद्रीय शहरी कार्य मंत्री पुरी से मिला आश्वासन

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(शशि कोन्हेर) : रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रतिनिधि मंडल ने आज दिल्ली में केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री हरदीप पुरी से मुलाकात कर रायपुर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में व्याप्त भ्रष्टाचार के सम्बंध में ज्ञापन  सौंपा। पूर्व लोक निर्माण मंत्री राजेश मूणत, लोकसभा सांसद सुनील सोनी, राज्यसभा सांसद सरोज पांडेय, शहर जिला अध्यक्ष जयंती पटेल, नगर निगम की नेता प्रतिपक्ष मीनल चौबे की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री श्री पुरी से कार्यवाही करने की मांग की। केंद्रीय मंत्री ने भाजपा प्रतिनिधि मंडल को आश्वस्त किया कि प्राथमिकता के साथ इस पर जांच कराकर यथोचित कार्यवाही की जायेगी।

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पूर्व मंत्री श्री मूणत व सांसदों सुनील सोनी, सरोज पांडेय के साथ भाजपा पार्षद दल के प्रतिनिधिमंडल ने श्री पुरी को सौंपे ज्ञापन में जानकारी दी कि स्मार्ट सिटी रायपुर के कार्यों में लापरवाही और भ्रष्टाचार से व्यथित हो कर आज हम सभी जनप्रतिनिधि आप से भेंट करने आये हैं। वर्ष 2018 में स्मार्ट सिटी रायपुर का प्लान साइज 926.8 करोड़ रुपये की आई।

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जिसमें 70 मुख्य परियोजनाएं एवं 314 उप परियोजनाएं स्वीकृत हुई। सितम्बर 2022 में इनमें 185 योजना, जिसके लिए स्वीकृत राशि 388.74 करोड़ रुपये है, को पूर्ण बताया जा रहा है।8.12.2015 को नगर निगम रायपुर द्वारा प्रथम चरण में प्रस्ताव तैयार कर केन्द्र शासन को भेजा गया था। उस प्रस्ताव के अनुकूल कार्य नहीं किया गया है। प्रतिस्पर्धा के जनभागीदारी एवं जन सुझाव के आधार पर पेन सिटी के लिए प्लान (वित्तीय प्लान सहित) तैयार कर भारत सरकार को भेजा गया।

कार्य उसके अनुरूप नहीं हो रहा है एवं 129 परियोजना का प्रगतिरत जिसके लिए स्वीकृत राशि 538.05 करोड़ रुपये बताई जा रही है। उपर्युक्त कार्य में पूरा फर्जीवाड़ा और अत्याधिक आर्थिक हेराफेरी है। जिसका भौतिक सत्यापान आप किसी को भी भेज कर करवा सकते हैं। हम दावे के साथ कह सकते हैं कि धरातल पर उपर्युक्त कार्य बताये अनुसार नहीं हुए है।

भाजपा प्रतिनिधि मंडल ने कहा कि पूर्व में यह कहा गया था कि स्मार्ट सिटी के अन्तर्गत ए.बी.डी. एरिया में कार्य किया जायेगा। कुछ समय पश्चात ए.बी.डी. एरिया के बाहर छोटे- छोटे कार्यों को, जो कि नगर निगम के स्तर का था, महापौर के दबाव में स्मार्ट सिटी के अधिकारी करने लग गये। जिसकी जानकारी जनप्रतिनिधियों को नहीं दी गई।
बहुत ही छोटे – छोटे चौक चौराहों के सौन्दर्यीकरण पर करोड़ों का खर्चा दर्शाया जा रहा है, जो कि नामुनकिन है। बार बार शिकायत करने के बावजूद भी कार्यों में गंभीरता नहीं दिखाई गई।

प्रतिनिधि मंडल ने कहा कि हमारे पास लिस्ट है जिसमें स्मार्ट सिटी के द्वारा 185 योजनाओं को पूर्ण बताया जा रहा है, जो फर्जी है। 129 कार्यां को प्रगतिरत बताया जा रहा है जिसमें से कई कार्य अस्तित्व में ही नहीं हैं। कार्यों की बिंदुवार जांच के लिए कोई प्रतिनिधि मंडल भेजें जो वास्तविकता को देख पाये।  पूरी 314 परियोजनाएं, जिसमें कुछ को छोट कर सभी में अनिमितताएं एवं लापरवाही है।  देखरेख के आभाव में  अधिकांशतः मर गये हैं। इसका जिम्मेदार कौन है?

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