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मुलायम सिंह को पद्म विभूषण देने से हिंदुओं में गुस्सा’, संजय राउत ने केंद्र सरकार पर बोला हमला

(शशि कोन्हेर) : गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों पाने वालों की सूची जारी की गई. इस लिस्ट में सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव का भी नाम था. उन्हें मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया जाएगा. कई लोगों ने इस फैसले का विरोध किया. लेकिन शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने इसका कड़ा विरोध किया. उन्होंने वर्तमान केंद्र सरकार पर भी इसे लेकर निशाना साधा.

संजय राउत ने मुलायम सिंह को कारसेवकों का हत्यारा बताया. महाराष्ट्र में शिवसेना आक्रोश मार्च निकाल रही है. ऐसे में संजय राउत ने मुलायम सिंह को पद्म विभूषण देने का विरोध जताया.

8 सालों से हिंदू राज के बावजूद हिंदुओं में आक्रोश

संजय राउत ने कहा, ‘आक्रोश मार्च ने साबित कर दिया कि शिवसेना और शिवसेना भवन ही हिंदुओं का एकमात्र आशा स्थान है. 8 वर्षों तक शक्तिमान हिंदू नेताओं के राज के बावजूद हिंदुओं को आक्रोश करना पड़ रहा है, यह किसकी असफलता है? कारसेवकों की हत्या करवाने वाले मौ.मुलायम सिंह को पद्म विभूषण! हिंदू आक्रोश करेंगे ही!’

सामना के जरिए साधा निशाना

बीते दिन यानी शनिवार को मुलायम सिंह को दिए गए इस सम्मान पर उद्धव ठाकरे गुट के मुखपत्र सामना में भी सवाल उठाए गए थे. सामना में लिखा गया था कि मुलायम सिंह यादव का सम्मान करने वाली मोदी सरकार दो हिंदू हृदय सम्राटों वीर सावरकर और बालासाहेब ठाकरे को भूल गई, लेकिन लोगों को इस घटना को याद रखना चाहिए. सामना ने लिखा है कि स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव को भी पद्म विभूषण पुरस्कार दिया गया है, इसे आश्चर्यजनक ही कहा जाएगा.

कारसेवकों पर चलवाई गोली

जीवित रहते कारसेवकों के हत्यारे के तौर पर उनकी अवहेलना करने वाली बीजेपी सरकार को मुलायम को मरणोपरांत सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने की जरूरत पड़ी, यह जरूरी है. सामना में लिखा गया कि अयोध्या में अब राम मंदिर बन रहा है और उसी राम मंदिर के नाम पर हर चुनाव में वोट मांगे गए.

हालांकि, 90 के दौर में हुए अयोध्या आंदोलन के दौरान उस वक्त उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव ने कारसेवकों पर अंधाधुंध फायरिंग करवाई थी. जिसमें सैकड़ों साधु-संत और कारसेवक मारे गए थे. कई लाशों को सरयू नदी में फेंक दिया गया था. तब कारसेवकों के खून से सरयू नदी लाल हो गई थी.

हिंदुओं को गोली मारने को तैयार थे मुलायम

उस वक्त कड़ा विरोध झेल रहे मुलायम सिंह ने यह तक कहा था कि बाबरी मस्जिद को बचाने के लिए अगर और हिंदुओं को गोली मारनी पड़ती तो भी वो आगे पीछे नहीं देखते. तब भाजपा और संघ ने भी मुलायम सिंह की खूब आलोचना की थी.

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