छत्तीसगढ़बिलासपुर

खतरे की घंटी…अगर बिलासपुर नगर निगम की कडकी दूर नहीं हुई तो, विधानसभा चुनाव के दौरान वार्डों में मुश्किल होगी…!

(शशि कोन्हेर) : बिलासपुर। बिलासपुर शहर में स्मार्ट सिटी से जुड़े अधिकारियों कर्मचारियों के दोनों हाथों में लड्डू और सिर कढ़ाई में है। वहीं नगर निगम का अपना अमला एक एक पैसे को तरस रहा है। स्मार्ट सिटी का मैनेजमेंट जहां नेहरू चौक के चारों छप्पर फाड़ पैसा खर्चा कर रहा है। वही बिलासपुर नगर निगम में आने वाले शहर के अधिकांश वार्ड पाई पाई को तरस रहे हैं। स्मार्ट सिटी के तहत जहां बनी बनाई सड़कों को फिर से टिप टॉप बनाया जा रहा है। वही अधिकांश वार्डों में कांक्रीट की उधड़ी या उधड़ चुकी सड़कों की मरम्मत अथवा नवीनीकरण नहीं कराने के कारण वार्डों के मतदाता अपने-अपने पार्षदों की आरती उतार रहे हैं।

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(आरती मतलब समझ गए ना आप) शहर के दो तीन पार्षदों ने मुझसे अपना दुखड़ा रोते हुए कहा कि स्मार्ट सिटी के लोग पैसों की दरिया में गोते लगा रहे हैं। और शहर के अधिकांश मोहल्लों में  उखड़ी, टूट-फूट चुकी और जर्जर सड़कों को बनाने के नाम पर वहां रहने वाले लोग रोज पार्षदों को उल्टा सीधा कह रहे हैं। बिलासपुर नगर निगम के अंतर्गत कुल 70 वार्ड आते हैं। इनमें से अधिकांश वार्ड में विकास और निर्माण कार्य के साथ ही तबाह हो चुकी सड़कों का पुनर्निर्माण बेहद जरूरी है।

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इसी साल नवंबर दिसंबर में प्रदेश विधानसभा के और इसी तरह बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र के भी चुनाव होने हैं। बिलासपुर नगर निगम में बिलासपुर, बेलतरा, मस्तूरी बिल्हा और तखतपुर विधानसभा क्षेत्रों का भी ऐसा एरिया आता है जिसमें खचाखच वोटर भरे हुए हैं। और इन विधानसभा क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले वार्डों मोहल्लों में विकास और निर्माण के नाम पर जिस तरह नील बटे सन्नाटा पसरा हुआ है।

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उसका खामियाजा नगर निगम में सत्ताधारी पार्टी को उठाना पड़ सकता है। बिलासपुर शहर से जुड़े बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में नगर निगम के जो वार्ड आते हैं उनमें रहने वाले हजारों वोटरों को चुनाव परिणामों की दृष्टि से निर्णायक माना जा सकता है। यही हाल बिल्हा तखतपुर और मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र में आने वाले वार्डों का है। मसलन तिफरा और सिरगिट्टी तथा यदुनंदन नगर के मतदाता अगर नाराज हो गए तो यहां के 8 से 10 हजार वोट जोखिम में पड़ सकते हैं। इसी तरह सकरी से लेकर अमसेना छतौना, और उसलापुर की घनी बस्तियों में रहने वाले हजारों मतदाता वार्ड में विकास और निर्माण तथा सड़कों का काम नहीं होने से अपना गुस्सा चुनाव में उतार सकते हैं।

नगर निगम में सत्तारूढ़ पार्टी को अभी से इसकी चिंता करनी चाहिए। बिलासपुर नगर निगम के 70 वार्डों के लिए सड़क और विकास व निर्माण कार्यों के लिए, प्रति वार्ड दो करोड़ों रुपए के हिसाब से नगर निगम ने शासन के पास 150 करोड़ रुपए की राशि देने का प्रस्ताव भेजा है। यह
भारी- भरकम राशि बिलासपुर नगर निगम को शासन से मिल जाएगी, इसकी उम्मीद सपने में भी नहीं की जा सकती।

और अगर यह राशि नहीं मिली तो बिलासपुर नगर निगम के अंतर्गत आने वाले 70 वार्डों में कामकाज पूरी तरह ठप रहेगा। जिसका नुकसान किसे उठाना पड़ेगा यह बताने की कोई जरूरत शायद नहीं है..? समझदार को इशारा काफी..! जानकारी मिली है कि बिलासपुर नगर निगम को प्रदेश शासन से फिलहाल केवल 15 करोड़ों रुपयों की राशि के लिए घुमाया फिराया लटकाया जा रहा है। सोचा जा सकता है कि जब शासन से 15 करोड़ों रुपए पाने के लिए महापौर समेत नगर निगम को इतने पापड़ बेलने पड़ रहे हैं तो 150 करोड़ रुपए की राशि शासन से हासिल होने की उम्मीद, मरुस्थल में पानी के झरने का सपना देखने जैसी ही साबित होगी।

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