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दिल्ली के मेयर चुनाव में आम आदमी पार्टी को भाजपा से “चंडीगढ़ कांड” का डर.. आखिर क्या हुआ था चंडीगढ़ में..?

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(शशि कोन्हेर) : मेयर चुनाव के लिए के लिए बुलाई गई बैठक में जूतमपैजार होने के बावजूद यह लगभग तय है कि संख्या बल के मामले में आम आदमी पार्टी… भाजपा की तुलना में अधिक मजबूत है। इस समय दिल्ली में आम आदमी पार्टी के पास 134 पार्षद 3 राज्यसभा सांसद और 14 विधायकों का प्रचंड समर्थन है। इतने वोट की गारंटी होने के बाद भी आम आदमी पार्टी भाजपा से क्यों डर रही है ? जबकि भाजपा के पास 104 पार्षद सात लोकसभा सांसद और 12 एल्डरमेन के वोट भर हैं। इस हिसाब से मेयर चुनाव में आम आदमी पार्टी का पलड़ा, भाजपा की तुलना में काफी भारी दिख रहा है। इसके बाद भी मेयर चुनाव को लेकर अगर आम आदमी पार्टी भाजपा से डर रही है तो उसकी वजह भी है। दरअसल आम आदमी पार्टी को डर है कि भारतीय जनता पार्टी मेयर चुनाव में चंडीगढ़ जैसा कोई एपिसोड ना दोहरा दें।

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दरअसल चंडीगढ़ में अल्पमत होने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी ने जिस तरह अपना मेयर चुनवा लिया था। बस वही डर आम आदमी पार्टी को खाये जा रहा है। चंडीगढ़ में कुल पार्षदों की संख्या 35 है। गत निगम चुनाव में वहां से आम आदमी पार्टी के 14 और बीजेपी के सिर्फ 12 पार्षद चुनाव जीत कर आए थे। इसके बावजूद भारतीय जनता पार्टी संख्या बल में कम होने के बाद भी अपना मेयर बनाने में कामयाब रही थी। आम आदमी पार्टी को डर है कि चंडीगढ़ के प्रयोग को भारतीय जनता पार्टी दिल्ली में भी दोहरा सकती है। और इसीलिए मेयर के चुनाव में आम आदमी पार्टी के नेता फूंक-फूंक कर कदम बढ़ा रहे हैं।

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