कानन ज़ू में नन्हें मेहमानों की दस्तक – बाइसन और शुतुरमुर्ग शावकों ने बढ़ाई रौनक

(भूपेंद्र सिंह राठौर) : बिलासपुर – कानन पेंडारी जू में वन्य जीवन प्रेमियों के लिए खुशखबरी है। यहां दो नन्हें मेहमानों ने जन्म लिया है एक बाइसन और एक शुतुरमुर्ग। इन मासूमों की झलक पाने के लिए अब पर्यटकों की भीड़ उमड़ रही है।
बिलासपुर के कानन पेंडारी जू में इन दिनों बहार का मौसम है। बसंती नाम की मादा बाइसन ने एक मादा शावक को जन्म दिया है, वहीं दूसरी ओर एक नन्हा शुतुरमुर्ग भी जू का हिस्सा बना है। इन दोनों को लगभग एक महीने तक पर्यटकों से दूर रखा गया, ताकि वे सुरक्षित और स्वस्थ तरीके से बड़ा हो सकें।
अब जब दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं, तो उन्हें खुले केज में पर्यटकों के लिए प्रस्तुत किया गया है। दोनों ही नन्हे मेहमान अब पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन गए हैं।
बाइसन शावक अपनी मां बसंती के साथ पूरे दिन केज में चहल-पहल करता दिखाई देता है। वहीं शुतुरमुर्ग शावक भी खूब फुर्ती से दौड़ता है, जिसे देखकर बच्चों के चेहरे पर मुस्कान खिल उठती है। लोग इनकी तस्वीरें खींचने से खुद को रोक नहीं पा रहे।
कानन पेंडारी जू सिर्फ एक चिड़ियाघर नहीं, बल्कि वन्य प्राणियों के संरक्षण और प्रजनन का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। पहले जहां यहां बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए अन्य जू पर निर्भर रहना पड़ता था, वहीं अब यहां खुद प्रजनन कर उन्हें अन्य जू को दिया जा रहा है।
अब इसी श्रेणी में बाइसन और शुतुरमुर्ग भी शामिल हो गए हैं।
नए जन्म के साथ अब बाइसन की कुल संख्या पांच हो गई है— तीन मादा और दो नर। वहीं शुतुरमुर्ग अब सात हो चुके हैं। प्रबंधन के अनुसार, कुछ और केज में भी नए मेहमान आने वाले हैं, जिनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अभी जानकारी साझा नहीं की जा रही है।
तो अगली बार जब आप कानन पेंडारी जू जाएं, तो इन नन्हें मेहमानों से जरूर मुलाकात करें। इनकी मासूमियत और ऊर्जा न केवल वन्यजीव प्रेम को बढ़ाती है, बल्कि संरक्षण की दिशा में उम्मीद भी जगाती है।




