बिलासपुर

आदिवासी युवती के साथ दुष्कर्म के मामले में चुप क्यों हैं..? प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अरुण साव…और कोई आरोपी रहता तो अभी तक आसमान सर पर उठा देते भाजपा नेता..?

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(शशि कोन्हेर) : बिलासपुर। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अरुण साव ने आज बिलासपुर के अपने निवास पर जनता दरबार या कहें जनदर्शन का आयोजन किया। इस दरबार में भी उनके दरवाजे पर न्याय मांगने के लिए आने वाले लोगों से आवेदन और शिकायत के कागजात लेते रहे। लेकिन जनता का दुख दर्द सुनने के लिए दरबार लगाने वाले भाजपा अध्यक्ष क्या जनता को इस बात का जवाब देंगे कि जांजगीर चांपा जिले की एक आदिवासी युवती के द्वारा नेता प्रतिपक्ष के पुत्र पलाश चंदेल के खिलाफ दुष्कर्म और धमकाने के मामले में दर्ज रिपोर्ट पर वे चुप क्यों हैं..? इस मामले में अगर हुए तकरीबन 1 सप्ताह हो चुका है। लेकिन इसके बावजूद इस मामले में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष समेत तमाम नेताओं का रहस्यमय मौन समझ से परे है।

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प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बलात्कार पीड़िता युवती और उसके परिवार की संपूर्ण सुरक्षा तथा आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी के निर्देश दे चुके हैं। लेकिन भाजपा नेताओं की इस मामले में आपराधिक चुप्पी को प्रदेश की जनता शक की नजर से देख रही है। अगर दुष्कर्म का ऐसा ही आरोप किसी कांग्रेसी नेता अथवा उसके पुत्र पर लगा होता तो क्या भाजपा नेता तब भी ऐसी ही खौफनाक चुप्पी ओढ़े रहते।

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अगर ऐसा होता तब तो भारतीय जनता पार्टी ने अभी तक आरोपी और उसके पिता के खिलाफ आसमान सर पर उठा लिया होता। लेकिन जब मामला भाजपा के अपने नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल और उनके पुत्र पलाश चंदेल का है तब भाजपा किस तरह मुंह छुपाए बैठी है..? उसे पूरा प्रदेश और प्रदेश की महिलाएं देख रही हैं। यह शर्मनाक इसलिए भी अधिक है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा बुलंद किए हुए हैं। ऐसे में उनकी पार्टी के नेता और छत्तीसगढ़ के नेता प्रतिपक्ष के पुत्र पर दुष्कर्म का आरोप लगना सोचनीय है। कायदे से अगर यही आरोप किसी कांग्रेसी नेता और उसके पुत्र पर लगा होता तो भाजपा नेता आरोपी को तत्काल पद से हटाने और गिरफ्तार करने की मांग करते हुए आसमान सिर पर उठा लेते।

कायदे से इसमें दलीय राजनीति से ऊपर उठकर भारतीय जनता पार्टी को अपने नेता प्रतिपक्ष को पद से हटाने की कार्रवाई करनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं भी करना चाहती तो कम से कम भाजपा को आदिवासी युवती के साथ हुए दुष्कर्म की घोर निंदा तो करनी ही चाहिए। यदि भाजपा इतना नैतिक साहस नहीं दिखाती तो यही माना जाएगा कि पार्टी में अपने नैतिकता के सिद्धान्त जमीन के दस फिट नीचे गड़ा दिए हैं।। दर असल आज जब खुद पर बात आई है तो इस पार्टी के दिग्गज नेताओं और खासकर प्रदेश अध्यक्ष ने अपने मुंह पर ताले क्यों लगा रखे है। ऐसे में प्रदेश में अगर आने वाले समय में किसी भी बेटी के साथ ऐसा ही दुष्कर्म का मामला सामने आता है तो भारतीय जनता पार्टी और उसके नेता, किस मुंह से उसका विरोध कर पाएंगे..? यह जरूर भारतीय जनता पार्टी को सोचना चाहिए।

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