देश

उत्तरकाशी के इस गांव में मकानों के भीतर फूट रही जल धाराएं, धरती से आ रही अजीब आवाजें

Advertisement

(शशि कोन्हेर) : उत्तराखंड में भूधंसाव को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। भूधंसाव और मकानों में दरारें पड़ने जैसी समस्याओं से जूझ रहे उत्तरकाशी जिले के मस्ताड़ी गांव के लोग इन दिनों चिंता में है। लगातार हो रही बारिश ने लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। शनिवार को हुई बारिश के दौरान मस्ताड़ी गांव के ग्रामीण भय के कारण रातभर जागते रहे। उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मस्ताड़ी गांव के लोगों का कहना है कि घरों में आंगन से लेकर रास्तों तक में दरारें और अधिक चौड़ी हो गई हैं।

Advertisement

गांव के निवासियों की सूचना पर शनिवार देर रात नायब तहसीलदार के नेतृत्व में त्वरित प्रतिक्रिया दल मौके पर पहुंचा और स्थिति का जायजा लिया। मस्ताड़ी के ग्राम प्रधान सत्यनारायण सेमवाल ने बताया कि वर्ष 1991 में आए भूकंप के बाद से गांव में लगातार भूस्खलन हो रहा है, लेकिन शासन स्तर पर गांव की सुध नहीं ली जा रही है। सेमवाल ने कहा कि भूकंप से मस्ताड़ी गांव में दरारें पड़ने और भूस्खलन होने की सूचना पर 1997 में उसका भूविज्ञानियों ने सर्वेक्षण किया था।

Advertisement

ग्रामीणों को विस्थापित करने और वहां सुरक्षा संबंधी कार्य करने के सुझाव भी दिए थे। हालांकि, उन्होंने कहा कि 26 वर्ष बीत जाने के बाद भी इस दिशा में कोई कार्य नहीं किया गया। शनिवार की रात बारिश के कारण मस्ताड़ी गांव में लोगों के घरों में आंगन से लेकर रास्तों तक में दरारें और अधिक चौड़ी हो गईं। एक ग्रामीण चंद्रमोहन का आंगन का बड़ा हिस्सा भूधंसाव की जद में आ गया जबकि अन्य ग्रामीणों के मकानों में दरारें बढ़ गईं।

Advertisement

भूस्खलन से घरों की सुरक्षा दीवार और खेतों के पुश्ते भी ढह रहे हैं। सेमवाल ने बताया कि कई ग्रामीणों के मकानों के अंदर से पानी निकल रहा है जबकि जमीन के अंदर से भी पानी की आवाजें आ रही हैं। इससे गांव के लोग दहशत में हैं। उत्तरकाशी जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल ने बताया कि ग्रामीणों की मांग पर गांव की भूमि की तीन बार भूगर्भीय जांच हो चुकी है। उन्होंने कहा कि गांव में पानी का रिसाव भूमि के अंदर से ही हो रहा है जिसकी जांच के लिए शासन स्तर पर एक टीम भेजने का अनुरोध किया गया है।

Advertisement
Advertisement

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button