स्थानांतरण नीति पर पलीता: संलग्नीकरण और कार्यादेश का खेल जारी, स्वास्थ्य विभाग सवालों के घेरे में

(जयेन्द्र गोले) : बिलासपुर – जिले में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर विवादों में आ गई है। सरकार जहां स्थानांतरण नीति 2025 को सख्ती से लागू करने की बात कह रही है, वहीं सीएमएचओ कार्यालय, जिला और विकासखंड मुख्यालयों में सलग्नीकरण और कार्यादेश का खेल अभी भी बदस्तूर जारी है।
नीति के बिंदु क्रमांक 3.17 के अनुसार, सलग्नीकरण व कार्यादेश स्वतः समाप्त माने जाने हैं, और स्थानांतरित कर्मचारियों को तुरंत कार्यमुक्त किया जाना था। लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट है – कई कर्मचारी अब भी पूर्व पदस्थापना वाले स्थान पर जमे हुए हैं।
आरोप है कि जेडी और सीएमएचओ कार्यालय में सिर्फ कागजों पर खानापूर्ति की जा रही है, जबकि धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही। वहीं, सिस्टम में दोहरी भूमिका निभा रहे कर्मचारी भी नियमों की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं।कुछ कर्मचारियों को जिले के भीतर से बाहर किया गया, लेकिन बाहर से आए कर्मियों को कार्यमुक्त नहीं किया गया, जिससे स्थिति और अधिक संदिग्ध हो गई है।
डॉ. स्वाति वंदना सिसोदिया, जॉइंट डायरेक्टर, स्वास्थ्य ने कहा कि : बिलासपुर CMHO कार्यालय से जिन कर्मचारियों का स्थानांतरण हुआ है या जिन्हें कार्यमुक्त किया गया है, उनकी जानकारी हमारे पास उपलब्ध है। लेकिन पूरे संभाग की जानकारी मेरे पास इस समय नहीं है। जो भी सूचनाएं हैं, वह संबंधित कार्यालय स्तर पर ही उपलब्ध होती हैं।
मजेदार बात यह है कि जब स्थानांतरण आदेश की कॉपी मांगी गई, तो इसे गोपनीय बताकर दिखाने से इनकार कर दिया गया – जो शासन के आदेशों की अवहेलना की स्पष्ट मिसाल है।
अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस गड़बड़ी पर कब और कैसे कार्रवाई करते हैं – या फिर स्वास्थ्य विभाग की घड़ी यूं ही बिना सुई के चलती रहेगी।




