छत्तीसगढ़

हमसफर एक्सप्रेस में बासी भोजन परोसा पैंट्री कार वालों ने…और मैनेजर ने तोहमत रेलवे पर लगा दी

(भूपेंद्र सिंह राठौर) : बिलासपुर : निजामुद्दीन- दुर्ग हमसफर एक्सप्रेस की पेंट्रीकार से यात्रियों को बासी भोजन परोसा गया। इस अव्यवस्था से नाराज एक यात्री ने मैनेजर न जमकर खरीखोटी सुनाई। इस पर गलती मानने के बजाय मैनेजर पूरी जिम्मेदारी रेलवे पर डाल दी।

पेंट्रीकार में यात्रियों का समस्या का समाधान नहीं हो रहा है,अब यात्री  इसकी शिकायत रेलवे बोर्ड व आइआरसीटीसी के मुख्यालय में करने की बात कह रहे है। मामला गुरुवार का है। हमसफर एक्सप्रेस ट्रेन के बी-11 कोच में दिल्ली से रायपुर तक सतीश राय नाम के एक यात्री सफर कर रहे थे। उन्हें रायपुर में जरुरी काम है। इसलिए इस ट्रेन में सफर कराए थे, ताकि जल्द पहुंचकर काम पूरा करा सके।

इसका रायपुर पहुंचने का समय सुबह आठ बजे के करीब है। लेकिन यह ट्रेन चार घंटे विलंब से रवाना हुई। इस लेटलतीफी के कारण यात्रियों को परेशानी हुई। इसके असर ट्रेन की खानपान व्यवस्था पर भी पड़ा। लाइसेंसी ने यात्रियों को बासी खाना का पैकेज दे दिया। यात्री भूखे थे, इसलिए पैकेट खोलकर सीधे खान लगे। पहले निवाले में ही उन्हें समझ आ गया कि यह भोजन खाने योगय नहीं है। पेंट्रीकार के कर्मचारी जानबुझकर इसे थमा दिए थे। कुछ जिन्हें ज्यादा भूख लग रही थी, वह तो खा लिए।

यात्री सतीश राय ने इसका विरोध किया और कहां कि खानपान में इतनी अव्यवस्था किस लिए। सबसे विड़ंबना बात यह है कि ट्रेन में भी यात्रियों को यह भोजन दिया गया है। अधिकांश ने इसे चखने के बाद  रख दिया। लेकिन उन्होंने नाराजगी भी जताई। इस पर मैनेजर कहने लगा कि खाना तो हम समय पर तैयार कर लिए थे, लेकिन ट्रेन विलंब हुई है। इसलिए यात्रियों यह दिक्कत आई है। इसमें कंपनी की कोई जिम्मेदारी नहीं है।

मैनेजर का कहना है कि पेंट्रीकार की कंपनी ने तो समय पर खाना- नास्ता तैयार कर लिया था। यदि ट्रेन में समय पर नहीं रवाना हुई, तो इसमें उनकी क्या गलती। एक यात्री ने इस भोजन के कारण तबीयत बिगड़ने की बात भी कही ,इधर यात्री सतीश राय का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा के लेकर खानपान की व्यवस्था रेल प्रशासन की है। लेकिन पेंट्रीकार में नियमित जांच नहीं होती है और न ही मानिटरिंग को लेकर किसी तरह सख्ती बरती जाती है।

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