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एक बार फिर वरुण गांधी के कांग्रेस में जाने की चर्चा.. जानिए क्या कहती है यह रिपोर्ट

(शशि कोन्हेर) : यूपी के पीलीभीत से बीजेपी सांसद वरुण गांधी लंबे समय से अपनी ही पार्टी से नाराज चल रहे हैं। उन्होंने एक के बाद एक कई ऐसे बयान दिए हैं, जिसके बाद सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या आने वाले लोकसभा चुनाव में बीजेपी उन्हें उम्मीदवार बनाएगी या नहीं।

हालांकि, अभी कुछ स्पष्ट नहीं हो सका है, लेकिन अटकलें हैं कि वे कांग्रेस का भी रुख कर सकते हैं। गांधी परिवार से आने वाले वरुण गांधी को लेकर उनके चचेरे भाई राहुल गांधी से भी सवाल पूछा जा चुका है। वरुण और राहुल के हालिया बयानों में कई समानताएं भी दिखी हैं।

‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान, जहां राहुल गांधी सीधे तौर पर हिंदू-मुस्लिम को लेकर मीडिया को निशाने पर ले रहे हैं तो वरुण गांधी ने भी पिछले महीने के आखिरी में दिए एक भाषण में ‘हिंदू-मुस्लिम’ का जिक्र करते हुए मीडिया पर हमला बोला। इसके अलावा, वरुण ने हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया को पत्र लिखकर कहा कि दुलर्भ बीमारी से ग्रसित मरीजों के लिए केंद्र सरकार द्वारा दी गई घोषणाओं को पात्रों तक पहुंचाया जाना चाहिए। बीजेपी सांसद के इन बयानों और पत्रों में साफ दिखता है कि वे अपनी ही सरकार पर वार करने का कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

कांग्रेस में जानें की क्यों ज्यादा अटकलें?
सूत्रों की मानें तो वरुण गांधी की अपनी चचेरी बहन प्रियंका गांधी से बातचीत होती रही है। दोनों भाई-बहन में यूं तो परिवार को लेकर ही बातचीत होती है, लेकिन अब माना जा रहा है कि यह बातचीत राजनीति को लेकर भी हो रही है। यदि वरुण गांधी बीजेपी से अपना नाता तोड़ते हैं तो उनके पास कई दलों के रास्ते खुले हैं। सपा, आरएलडी, बसपा जैसे दल वरुण को पार्टी में लेने से पीछे नहीं हटेंगे, लेकिन वरुण इन क्षेत्रीय दलों के बजाए कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय दल में जाना चाहेंगे। कमजोर स्थिति के बाद भी कांग्रेस इस समय बीजेपी के बाद सबसे ज्यादा सांसदों वाली पार्टी है। भले ही कांग्रेस का संगठन यूपी में सपा, बसपा के मुकाबले कमजोर हो, लेकिन कई हिंदी राज्यों में अब भी पार्टी मजबूत स्थिति में है। ऐसे में वरुण की संभावनाएं किसी क्षेत्रीय दल की तुलना में कांग्रेस में जाने की अधिक हैं।  

वरुण से आने पर कांग्रेस को क्या होगा लाभ?
गांधी परिवार से आने के बाद भी वरुण और उनके चचेरे भाई राहुल गांधी के बीच विचारधारा का काफी अंतर है। कई सालों पहले दिया गया भाषण वरुण गांधी का अब तक पीछा नहीं छोड़ रहा है। हालांकि, पिछले कुछ सालों में वरुण गांधी का मिजाज काफी बदल गया है। अब वे बीजेपी सरकार पर हमलावर हैं तो यह भी कहते हैं कि न तो वे कांग्रेस के खिलाफ हैं और न ही पंडित नेहरू के। देश को जोड़ने की राजनीति होनी चाहिए, तोड़ने की नहीं। आने वाले समय में वरुण बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में जाते हैं तो इससे न सिर्फ वरुण, बल्कि कांग्रेस को भी सियासी लाभ मिलने की उम्मीद है। यूपी जैसे अहम राज्य, जिसके लिए कहा जाता है कि प्रधानमंत्री बनने का रास्ता यूपी से होकर ही गुजरता है, वहां पर पार्टी वरुण का इस्तेमाल कर सकती है। तेज-तर्रार और युवा चेहरे के रूप में वरुण कांग्रेस को यूपी में आगे ले जा सकते हैं और खोई हुई जमीन को कुछ हदतक वापस दिलाने में मददगार हो सकते हैं।

उत्तर भारत में वरुण गांधी बड़ा चेहरा
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि वरुण यदि भविष्य में कांग्रेस का रुख करते हैं और आगामी लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी दक्षिण के राज्यों में कमान संभालते हैं, जबकि वरुण और प्रियंका गांधी को उत्तर भारत की कमान सौंपी जाती है तो इससे कांग्रेस को काफी लाभ मिल सकता है। इसमें दो राय नहीं है कि वरुण उत्तर भारत में काफी लोकप्रिय हैं। वहीं, हाल के हिमाचल चुनाव में प्रियंका ने चुनावी कैंपेन करके पार्टी को बहुमत दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। इस वजह से यदि उनको भाई वरुण का भी साथ मिलता है तो यकीनन कांग्रेस के लिए लाभ वाली ही स्थिति होगी। हालांकि, यह सब कहना तब तक जल्दबाजी ही होगी, जब तक वरुण गांधी को लेकर स्थिति साफ नहीं हो जाती है। ऐसे में आने वाले कुछ महीनों में देखना होगा कि वरुण कोई बड़ा कदम उठाते हैं या फिर बीजेपी में ही रहकर अपनी ही सरकार पर हमले जारी रखते हैं।

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