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अब 506 करोड़ से बनेगा बांके बिहारी मंदिर का गलियारा, एक साथ 10 हजार श्रद्धालु कर सकेंगे दर्शन..!

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(शशि कोन्हेर) : मथुरा :  ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के लिए प्रस्तावित गलियारे पर पांच अरब छह करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। हाई कोर्ट से हरी झंडी मिलते ही इस पर काम शुरू हो जाएगा। परिक्रमा मार्ग स्थित जुगल घाट से गलियारा का मुख्य प्रवेश द्वार होगा। गलियारा का स्वरूप ऐसा तैयार किया गया है कि उसके अंदर प्रवेश करते ही आराध्य की छवि बाहर से ही दिखाई देगी।

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पांच एकड़ में गलियारा प्रस्तावित
ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में बढ़ती भीड़ को देख सरकार ने यहां पांच एकड़ में गलियारा प्रस्तावित किया है। इसकी रूपरेखा भी तैयार कर ली गई है। जुगलघाट स्थित परिक्रमा मार्ग से इसका मुख्य रास्ता दिया गया है। यमुना के किनारे बन रहे यमुना रिवर फ्रंट से गलियारा के लिए रास्ता जाएगा। गलियारा के लिए जमीन का चिन्हांकन शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि जल्द ही इस पर काम भी शुरू हो जाएगा।

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मंदिर परिसर इतना भव्य और दिव्य होगा कि एक बार में कम से कम 10 हजार श्रद्धालु इसमें रुक सकते हैं। मंदिर परिसर में दो तल होंगे, एक निचला तल होगा और एक तल उससे साढ़े तीन मीटर ऊंचा बनाया जाएगा। ठाकुर बांकेबिहारी ऊपरी तल पर विराजमान होंगे। हर तल पर श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।

मंदिर आने के लिए बनेंगे तीन रास्ते
बांकेबिहारी मंदिर आने के लिए गलियारे में तीन रास्ते बनाए जाएंगे। एक रास्ता जुगलघाट से सीधा मंदिर तक पहुंचेगा। एक रास्ता विद्यापीठ चौराहे से आएगा और तीसरा रास्ता जादौन पार्किंग से आएगा, इसे वीआइपी मार्ग कहा जाता है। ये रास्ते करीब 20 से 25 मीटर तक चौड़े होंगे।

प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर होगा गलियारा
ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर परिसर इतना भव्य होगा कि यहां पर प्राकृतिक वातावरण के बीच श्रद्धालु बैठ सकेंगे। इसके लिए चार ऐसे स्थल विकसित किए जाएंगे, जो हरियाली के बीच पार्क के रूप में होंगे। यहां श्रद्धालुओं के बैठने की भी व्यापक व्यवस्था होगी।

प्रथम तल पर होगा मंदिर
यहां की बनावट के हिसाब से ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के परिसर को दो हिस्सों में बांटा जा रहा है। निचले तल पर श्रद्धालुओं बैठने के लिए दो हरे-भरे दो पार्क विकसित किए जा रहे हैं। ये परिसर करीब 11 हजार वर्गमीटर का होगा। यहां पांच हजार मीटर का खुला क्षेत्र होगा। यहां जूता घर, सामान कक्ष, सार्वजनिक सुविधाएं, शिशु देखभाल कक्ष, चिकित्सा सुविधा, विशिष्ट अतिथि कक्ष, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, पूजा सामग्री की दुकानें, तीर्थयात्री प्रतीक्षालय के साथ ही कान्हा की लीलाओं से सुसज्जित छायाचित्रों का गलियारा होगा।

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