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भुस्स हुई नवजोत सिंह सिद्धू की रैली, बड़बोले नेता को…न माया मिली, ना राम..!

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(शशि कोन्हेर) : उत्तर प्रदेश में एक पुरानी कहावत खूब चलती है.। जिसमें कहा जाता है… चौबे जी पछताएंगे..फिर, वही चना गुड़ खाएंगे.. कुछ ऐसी ही हालत पंजाब प्रदेश कांग्रेस के नव पदस्थ अध्यक्ष श्री नवजोत सिंह सिद्धू की होती दिखाई दे रही है। कैप्टन अमरिंदर सिंह से मुख्यमंत्री की कुर्सी छीनने में मुख्य भूमिका अदा करने वाले नवजोत सिंह सिद्धू के हाथ आखिर कुछ भी नहीं लगा। हालांकि यह कहा जा सकता है कि कांग्रेस ने उन्हें मजबूरी में ही सही पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष तो बनाकर रखा ही है। लेकिन राहुल गांधी ने धीरे-धीरे ही सही ऑपरेशन नवजोत के जरिए पुराने खिलाड़ी नवजोत सिंह सिद्धू की हालत उस शेर की तरह कर दी है जिसे नख दंत विहीन कर दिया गया हो। मतलब यह है कि राहुल ने जिस तरह कल की सभा में खुलेआम चरणजीत सिंह चन्नी की तारीफों के पुल बांधे, उससे यह साफ हो गया कि कांग्रेस पार्टी अब आलाकमान समेत पूरी तरह से, पंजाब के मुख्यमंत्री दलित मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के पीछे मजबूती से खड़ी है। ऐसे में अब नवजोत सिंह सिद्धू के पास बहुत ही कम विकल्प रह गए हैं। और जो विकल्प बचे हैं वह सिद्धू के लिए ही नुकसानदायक होंगे। मसलन नवजोत सिंह सिद्धू या तो राहुल गांधी के इस फैसले के विरोध में पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे सकते हैं। अथवा उनका आदेश और फैसला शिरोधार्य कर चुपचाप प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बने रह सकते हैं। लेकिन सिद्धू का जैसा मिजाज है, उससे तो ऐसा ही लगता है कि वह मन मसोसकर चुप नहीं बैठेंगे। लेकिन सवाल यह है कि वह आखिर क्या करेंगे..? अगर दे कांग्रेस से इस्तीफा देते हैं तो दूसरी कोई भी पार्टी उन्हें हाथों-हाथ लेने के लिए कतई तैयार नहीं है। ऐसे में सिद्धू क्या करते हैं यह देखने वाली बात होगी। हालांकि उनकी हालत “न निगलते बने और ना उगलते” जैसी हो गई है।

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