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विमान से डरते थे किम जोंग उन के पिता, लग्जरी ट्रेन में सफर के दौरान हो गई थी मौत

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(शशि कोन्हेर) : उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन अपनी लग्जरी ट्रेन से रूस पहुंच गए हैं। यहां वह रूस साथ सैन्य सहयोग पर वार्ता करने वाले हैं। कोरोना काल के बाद किम जोंग उन पहली बार विदेश यात्रा पर निकले हैं। धीरे-धीरे चलने वाली बख्तरबंद लग्जरी ट्रेन में वह 20 घंटे सफर करने के बाद व्लादिवोस्तोक पहुंचे हैं।

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जितनी चर्चा दुनियाभर में किम जोंग उन की होती है उतनी ही उनकी रहस्यमय ट्रेन की भी होती है। खास बात यह है कि यह ट्रेन उनके दादा को सोवियत यूनियन से ही उपहार में मिली थी। उनके दादा किम इल सुंग और पिता किम जोंग इल भी यात्रा के लिए इसी ट्रेन का इस्तेमाल किया करते थे। एक तरह से यह उत्तर कोरिया के शाही  शासकों के लिए शाही रथ है।

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विमान से डरते थे पिता
किम जोंग उन के पिता किम जोंग इल ने उत्तर कोरिया में 1994 से 2011 तक शासन किया। उन्हें हवाई यात्रा से बहुत डर लगता था और ऐसे में वह ट्रेन से सफर किया करते थे। वह 2001 में इसी ट्रेन से यात्रा करके मॉस्को में पुतिन से मिलने पहुंचे थे।

इस यात्रा में 10 दिन का समय लगा था। हालांकि उत्तर कोरिया की मीडिया के मुताबिक साल 2011 में ट्रेन के इंजन में ही यात्रा के दौरान किम जोंग इल की मौत हो गई थी। उन्हें हार्ट अटैक आ गया था।

विमान से भी सफर करते हैं किम जोंग उन
किम जोंग उन के पिता भले ही विमान से सफर नहीं करते थे लेकिन किम जोंग उन विमान का भी आनंद लेते हैं। सत्ता संभालने के बाद  2018 में उन्होंने  पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा विमान से ही की थी।

वह डेलियन शहर में राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने पहुंचे थे। इसके अलावा वह 2018 में विमान से दक्षिण कोरिया भी गए थे। उनके जहाज का नंबर पीआरके-615 है।

कैसी है किम जोंग उन की ट्रेन
किम जोंग उन की ट्रेन का नाम ताईयांघो है। कोरियन में इसका मतलब सूर्य होता है। उत्तर कोरिया के संस्थापक और किम जोंग उन के दादा किम इल सुंग ने ट्रेन से यात्रा करने का रिवाज शुरू किया था जो आज तक जारी है। वह पूर्वी एशिया के देशों में ट्रेन से जाया करते थे।

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एक पूर्व अधिकारी कानन्सेटेटि पुलिकोव्स्की की किताब के मुताबिक ट्रेन बाहर से हरे और पीले रंग की है। इस ट्रेन में तरह-तरह के व्यंजन का इंतजाम होता है। इसके अलावा मनोरंजन के साधन भी उपलब्ध होते हैं।

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इस ट्रेन में कुल 90 कोच हैं जिनमें कई डिब्बों में किम की बुलेटप्रुफ कारें होती हैं। इसके अलावा ट्रेन के ऊपर मोटी चादर है। ट्रेन का वजह बहुत बढ़ जाने की वजह से इसकी स्पीड 50 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटे के बीच ही रहती है।

ऐसे में किम जोंग उन को यात्रा में काफी समय लगता है। हालांकि ट्रेन के अंदर ही सारी सुविधाएं मौजूद हैं। ट्रेन केरास्ते में पड़ने वाले स्टेशनों की पूरी जांच की जाती है। इसके लिए हेलिकॉप्टरों का भी सहारा लिया जाता है।

ट्रेन में वर्जिन गर्ल्स
किताब के मुताबिक मनोरंजन के लिए ट्रेन में वर्जिन गर्ल्स भी होती हैं। कह सकते हैं कि वे एयर होस्टेस की तरह होती हैं जो लोगों का खयाल रखती हैं। उत्तर कोरिया में किम जोंग उन की सेवाओं के लिए वर्जिन गर्ल्स की भर्ती की जाती है जिनको मोटी सैलरी दी जाती है। शर्त यही होती है कि लड़कियां वर्जिन होनी चाहिए। इसके लिए डॉक्टरी जांच भी करवाई जाती है। पश्चिमी मीडिया इन लड़कियों को किम जोंग उन के सेक्स स्लेव भी कहता है।

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