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सीना चौड़ा करके तैयार हूं…..जब चीन पर राजनाथ सिंह ने कबूल की अधीर रंजन की चुनौती

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(शशि कोन्हेर) : लोकसभा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विपक्ष के नेता अधीर रंजन के बीच तू-तू मैं-मैं देखने को मिली। दोनों नेताओं के बीच बहस तब गर्मा गई जब, राजनाथ चंद्रयान-3 की सफलता के विषय पर चर्चा में अपनी बात रख रहे थे। उसी वक्त अधीर रंजन चौधरी ने राजनाथ को टोका और चीन पर सवाल पूछ लिया। राजनाथ सिंह ने अधीर रंजन को जवाब दिया- इतिहास में मत ले जाइए। ‘सीना चौड़ा’ करके तैयार हूं।

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बृहस्पतिवार को लोकसभा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि वह सदन में चीन के विषय पर ‘सीना चौड़ा करके’ चर्चा के लिए तैयार हैं। उन्होंने सदन में यह टिप्पणी उस वक्त की जब कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने यह चुनौती दी कि क्या उनमें चीन के बारे में चर्चा करने की हिम्मत है।


दरअसल, राजनाथ सिंह चंद्रयान-3 की सफलता के विषय पर अपनी बात रख रहे थे। तभी चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी ने उन्हें चीन मसले पर चुनौती दे डाली। पूछा कि क्या वे चीन पर बात करने को तैयार हैं?इस पर सिंह ने कहा, ”पूरी हिम्मत है…अधीर रंजन जी, इतिहास में मत ले जाइए।” इसके बाद रक्षा मंत्री ने कहा, ”चर्चा करने को तैयार हूं, सीना चौड़ा करके चर्चा को तैयार हूं।” इस दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के सदस्यों में नोकझोंक भी हुई।


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने भाषण की शुरुआत चंद्रयान-3 की कामयाबी पर इसरो को बधाई देकर की। उन्होंने कहा कि हमारे प्राचीन ग्रंथों में भी विज्ञान का जिक्र मिलता है। इस दौरान कांग्रेस समेत विपक्ष के अन्य नेताओं ने राजनाथ सिंह को टोकने की कोशिश की लेकिन, राजनाथ नहीं रुके। वह अपनी बात आगे कहते रहे। राजनाथ सिंह ने विपक्ष की चुटकी लेते हुए कहा कि हमारे विपक्ष के कई साथी कहते हैं कि भारतीय संस्कृति और विज्ञान साथ-साथ नहीं चल सकते लेकिन, अगर आप वैज्ञानिक सोच रखते हैं तो पूर्ति पूजा कैसे कर सकते हैं। संस्कृति का विरोध करना आज प्रगतिवाद का सूचक हो गया है।

गलवान हिंसा के बाद ज्यादा खराब हुए भारत-चीन रिश्ते
भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच रिश्ते पिछले तीन साल से ज्यादा खराब हुए हैं, जब पूर्वी लद्दाख में दोनों सेनाओं के बीच जबरदस्त संघर्ष सामने आया। इस हिंसा में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। चीनी पक्ष को भी इतना ही नुकसान हुआ था लेकिन, चीनी सेना पीएलए ने इसे कभी स्वीकार नहीं किया और न ही कभी हताहतों और मृतकों की संख्या का सटीक खुलासा किया।

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