बिलासपुर

प्रेस क्लब सदस्यों का कलेक्टर कार्यालय के सामने क्रमिक आंदोलन शुरू..पहले दिन सौ से अधिक पत्रकारों ने आंदोलन को दिया समर्थन

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बिलासपुर। बिलासपुर प्रेस क्लब का द्विवर्षीय कार्यकाल 23 जुलाई 2023 को खत्म हो चुका है। आरोप है कि उसके बाद भी प्रेस क्लब का चुनाव वर्तमान पदाधिकारी नहीं करा रहे है। इसके खिलाफ प्रेस क्लब सदस्यों ने सोमवार से क्रमिक आंदोलन शुरू कर दिया है।

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सुबह 11 बजे से लेकर दोपहर 2:00 बजे तक 100 से अधिक पत्रकारों ने इस धरने को समर्थन देकर जल्द से जल्द चुनाव कराए जाने की मांग प्रशासन से की है। मालूम हो कि प्रेस क्लब के वर्तमान पदाधिकारी चुनाव न कराकर अवैध तरीके से क्लब में कब्जा किए हुए हैं। जिससे पत्रकारों में खासा आक्रोश पनप गया है।

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इस संबंध में सचिव सहित तमाम प्रेस क्लब के सदस्यों ने पंजीयक,सहायक पंजीयक फर्म्स एवं संस्थाएं एवं कलेक्टर को समय से पूर्व सूचना देकर चुनाव कराने की मांग की थी,जिसका पालन कराने सहायक पंजीयक फर्म्स एवं संस्थाएं ने 10 जुलाई को अध्यक्ष को पत्र लिखकर चुनाव कराने के निर्देश दिए थे।जिसका पालन आज तक नहीं कराया गया है।

इस संबंध में पूर्व कलेक्टर से भी मिलकर प्रेस क्लब के सदस्यों ने उन्हें अपनी भावनाओ से अवगत कराया था।प्रेस क्लब के संविधान के विपरीत और नियमो के विरुद्ध कार्यकाल को आगे खींचा जा रहा है जो सरासर गलत है।

12 जुलाई को हुई आमसभा में सर्वसम्मति से नियमतः चुनाव कराने का प्रस्ताव पारित हुआ था मगर उस पर भी अमल नहीं किया गया। कार्यकाल खत्म होने से तीन दिन पहले अचानक 20 जुलाई को विशेष आमसभा बुलाई गई और उसमे प्रेस क्लब के संविधान में संशोधन के लिए प्रस्ताव लाया गया जिसके खिलाफ सदस्यों के उमड़े आक्रोश और जमकर हुए विवाद के कारण प्रस्ताव पारित नहीं हो पाया।और कार्यकारिणी के सदस्य कार्रवाई की पंजी लेकर भाग गए।

जो कार्रवाई सदन के भीतर होनी चाहिए थी उस कार्रवाई में कूटरचना कर घर,ऑफिस में जाकर हस्ताक्षर कराकर दूषित प्रस्ताव को कार्यकाल खत्म होने के बाद सहायक पंजीयक से उसे स्वीकृत कराने की कोशिश की जा रही है जो प्रेस क्लब के संविधान के खिलाफ और नियम,कानून के विपरीत है।

नाराज पत्रकारों ने कलेक्टर कार्यालय के सामने धरना देने के बाद कलेक्टर संजीव कुमार झा से मुलाकात की और उन्हें ये सारी गतिविधियों की जानकारी देकर प्रेस क्लब का द्विवार्षिक चुनाव बिना देरी किए कराने के साथ ही कूटरचित संविधान संशोधन के पेश आवेदन को खारिज करने की मांग की।

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