बिलासपुर

राज्यपाल सुश्री उइके ने किया पर्यावरण तीर्थ – मदकूद्वीप प्राकलन का शुभारंभ

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(शशि कोन्हेर) : बिलासपुर – छत्तीसगढ़ की राज्यपाल सुश्री अनसुईया उइके ने जिले के पवित्र शिवनाथ नदी के तट पर स्थित,, श्री श्री मांडूक ऋषि , ,प्राचीन धरोहर और दर्शनीय स्थल यज्ञशाला परिसर हरिहर क्षेत्र मद्कूद्वीप में आज पर्यावरण तीर्थ मद्कूद्वीप प्राकलन का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि मुझे पर्यावरण तीर्थ मदकूद्वीप के शुभारंभ अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। हरिहर आश्रम के महा त्यागी राम रूप दास जी से भेंट मुलाकात कर छत्तीसगढ़ राज्य की खुशहाली के लिए आशीर्वाद लिया एवं क्षेत्र के ग्रामीण अंचल के विषय पर चर्चा कर हर संभव मदद का आश्वासन भी दिया कार्यक्रम के दौरान अपने वक्तव्य एवं आशीर्वचन स्वरूप महामहिम राज्यपाल महोदय ने कहा की इस तीर्थ के शुभारंभ के साथ हम प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के स्वच्छ पर्यावरण, स्वच्छ भारत के सपने को साकार करने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि मैं आज पूजनीय गुरु रविदास को उनकी जयंती पर नमन करती हूं। अपनी रचनाओं के माध्यम से उन्होंने समाज के लोगों में नई चेतना जगाई। सामाजिक समानता और मानवता की उन्नति के लिए दी गई उनकी शाश्वत शिक्षाएं लोगों को जीवन जीने का मार्ग दिखाती हैं। संत रविदास जी का भाईचारे बंधुत्व, एकता, नैतिकता, मानवतावादी तथा परिश्रमरत रहने का संदेश सदियों तक लोगों को प्रेरित करता रहेगा।

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उन्होंने कहा कि जिस प्रकार तीर्थ जाकर हम और अधिक पवित्र इंसान बनने का संकल्प लेते हैं, ऐसे ही पर्यावरण तीर्थ में पर्यावरण को शुद्ध करने का संकल्प ले रहे हैं। आज यहां कार्यक्रम में भारत को प्लास्टिक मुक्त करने के लिए जनसंकल्प, नदियों के तटों पर पीपल, बरगद और नीम जैसे पौधों का रोपण, गंगा आरती और तुलसी के पौधों का निःशुल्क वितरण किया गया। जो कि अत्यंत पुनीत कार्य है।
राज्यपाल सुश्री उइके ने कहा कि प्रकृति की रचना वायु, जल, अग्नि, मृदा और आकाश इन पाँच तत्वों से हुई है। हम जिस वातावरण में निवास करते हैं, वह शुद्ध और पवित्र होना चाहिए, जिस जल को हम इस्तेमाल करते हैं वह स्वच्छ हो। उसमें आवश्यक तत्वों का संतुलन होना चाहिए। जिस मिट्टी में हम फसल उपजाते हैं, उसमें सभी पोषक तत्वों का संतुलित समावेश होना चाहिए। आज हम विकास के नाम पर उस अंधी दौड़ में शामिल हो गये हैं जहां जाने,अनजाने प्रकृति को नुकसान पहुंचा रहे हैंए जिसके भयावह दुष्परिणाम, जलवायु परिवर्तन के रूप में सामने आ रहे हैं। पुराने समय को याद करें तो पहले न हमें गर्मियों में एयर कंडीशन की जरूरत पड़ती थी न ही ठण्ड में हीटर की। जो घर बनते थे वह स्वयं वातानुकूलित होने का अहसास कराते थे। वायु इतनी शुद्ध थी कि किसी भी मास्क या एयर प्यूरीफायर की आवश्यकता नहीं पड़ती थी। जल इतना शुद्ध था कि उसे फिल्टर करने की आवश्यकता नहीं होती थी। अच्छी फसल उगाने के लिए किसी रासायनिक उर्वरक की जरूरत नहीं पड़ती थी, पौधे अपने आप पल्लवित होते थे, मौसम चक्र नियमित होता था, अपने समय पर ही गर्मी,ठण्ड और बारिश का आगमन होता था। परन्तु आधुनिकीकरण ने इतना कुछ बदल दिया है कि हमने सुख,सुविधा के लालच में मौसम को ही नियंत्रित करना शुरू कर दिया। एयरकंडीशन, फिज जैसे उपकरणों के बेतहाशा उपयोग ने वातावरण को दूषित कर दिया है। इनसे निकलने वाली गैसों ने ओजोन लेयर को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। वाहनों और बड़े-बड़े फैक्ट्रियों से निकले अपशिष्टों ने वातावरण को जहरीला कर दिया है। जल, मिट्टी, वायु सभी प्रदूषित हो गये हैं, यहां तक कि जो अनाज हम खा रहे हैं, उनमें भी हानिकारक तत्वों की मात्रा बढ़ने लगी है। इसके कारण नई-नई प्रकार की बीमारियां भी उत्पन्न हो गई हैं। इस पर्यावरण तीर्थ के शुरू होने के साथ कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा होगी। भारतीय संस्कृति में नदियों का बड़ा महत्व रहा है। बड़ी सभ्यताएं नदियों के किनारे ही विकसित हुई है। हमारे प्रमुख शहर भी नदियों के किनारे ही बसे हुए हैं। नदियां जीवनदायिनी होती हैं। नदियां धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है तथा इनको स्वच्छ रखना भी हमारा दायित्व है। हम नदियों को हमेशा माता कहकर पूजते आए हैं। इस प्रकल्प में नदियों के किनारे पर्यावरण तीर्थ स्थापना की संकल्पना की गई है, जिसके तहत शिव-गंगा आरती का आयोजन किया जाएगा। जरूरत है नदियों को स्वच्छ रखने के संकल्प की, ताकि इस पुनीत कार्य के द्वारा जीवनदायिनी नदियों का संरक्षण किया जा सके। इसके लिए सामूहिक भागीदारी से काम किए जाने की जरूरत होगी। प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा नदियों की सफाई व नदी जल के बेहतर प्रबंधन के लिए अनेक महत्वपूर्ण परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। नदियों की अविरल धारा, निर्मल धारा और स्वच्छ किनारा जैसी परिकल्पना को साकार करने के लिए नमामि गंगे योजना के अंतर्गत क्लीनेथॉन परियोजना् को विस्तार देने का काम किया जा रहा है। प्रमुख रूप से गंगा के अलावा देश की अन्य बड़ी नदियों को क्लीनेथॉन परियोजना में जोड़ा जा रहा है। नदी बेसिन प्रबंधन के माध्यम से नदी के कटाव को नियंत्रित करने का भी प्रयास जारी है। हम सभी का समन्वित प्रयास होना चाहिए कि अपने परिवेश के साथ साथ जल स्रोतों जिसमें नदियां प्रमुख है, उसकी साफ-सफाई व स्वच्छता को भी प्राथमिकता दें ताकि इन प्रकृति प्रदत्त संसाधनों का संरक्षण किया जा सके। आज यहां रोपित किए जा रहे बरगद, पीपल, नीम तथा तुलसी के पौधों का हमारे समाज में धार्मिक, आर्थिक के साथ पर्यावरण की दृष्टि से एवं अनेक बीमारियों के इलाज में भी बड़ा महत्व है। नीम और तुलसी के गुणकारी प्रभावों से आप सब परिचित ही हैं। कोरोना काल में तुलसी के कफनाशक गुणों के कारण इसके पेय से आमजनों को काफी लाभ हुआ। प्रकृति के लिए प्लास्टिक अत्यंत हानिकारक तत्व है। यह हजारों सालों में भी नष्ट नहीं होता और इसमें कई ऐसे तत्व होते हैं जो सेहत के लिए नुकसानदायक होते हैं। हम पॉलिथिन का उपयोग कर फेंक देते हैं, जिसे खाकर गौमाता बीमार पड़ जाती है। प्लास्टिक के बर्तन कई प्रकार के बीमारियों को जन्म देती है। हमें कोशिश करनी चाहिए कि प्लास्टिक का न्यूनतम उपयोग करें। उसकी जगह पर कपड़े, जूट और पेपर बैग जैसे वैकल्पिक साधनों को अपनाएं जो पर्यावरण अनुकूल होते हैं। इसके पूर्व राज्यपाल सुश्री उइके ने पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन के लिए प्लास्टिक मुक्त छत्तीसगढ़ की शपथ दिलाई। कार्यक्रम को छ.ग. विधानसभा नेता प्रतिपक्ष श्री धरमलाल कौशिक ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज हम सब लोगों का सौभाग्य है कि छत्तीगसढ़ के राज्यपाल सुश्री उइके ने पर्यावरण तीर्थ मद्कूद्वीप प्राकलन का शुभारंभ किया है। उन्होंने कहा कि प्राचीन धरोहर और दर्शनीय स्थल मद्कूद्वीप हरियाली और औषधीय पौधौं से परिपूर्ण होने के साथ-साथ हमारी आस्था का प्रतीक है जिसे इसे सहेजने का कार्य किया जा रहा है। इस अवसर पर श्री हरिहर क्षेत्र केदार दिवप मदकु हरिहर आश्रम से तपस्वी संत श्री श्री राम रूप दास महा त्यागी जी एवं वरिष्ठ सामाजिक क्षेत्र से जुड़े श्री सीताराम जी मुंगेली के विधायक पूर्व मंत्री छत्तीसगढ़ शासन श्री पून्नूलाल मोहले, पूर्व सांसद श्री लखनलाल साहू, हर्षिता पांडे कलेक्टर श्री अजीत वसंत, जिले पुलिस अधीक्षक श्री डी.आर. आंचला, भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी श्री गणेश शंकर मिश्रा, महेश शर्मा जीवनलाल कौशिक मनीष अग्रवाल हेम सिंह चौहान संजय सिंह ठाकुर प्रदीप शुक्ला प्रमोद दुबे अवधेश अग्रवाल मनीष साहू भगवती प्रसाद मिश्र कमलेश अग्रवाल, ग्रामीण के सरपंच श्री माखन बंजारे जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक पर्यावरण प्रेमी और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित हुए।

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