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क्या आप जानना चाहते हैं कि देश की अदालतों में कितने करोड़ मामले लंबित हैं..! तो पढ़िए यह खबर

(शशि कोन्हेर) : देश की अदालतों में करीब पांच करोड़ मामले लंबित हैं। केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री किरण रिजिजू ने शनिवार को यहां कहा कि यदि कोई कार्रवाई नहीं की गई तो मुकदमों की संख्या में और वृद्धि होगी।

औरंगाबाद में महाराष्ट्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एमएनएलयू) के पहले दीक्षा समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने वकीलों की फीस वहन करने में आम लोगों की असमर्थता को लेकर चिंता भी जताई।

किरण रिजिजू  ने कहा, ‘भारतीय न्यायपालिका की गुणवत्ता विश्व भर में प्रसिद्ध है। दो दिन पहले मैं लंदन में था जहां मेरी मुलाकात वहां की न्यायपालिका से जुड़े लोगों से हुई। वे सभी भारतीय न्यायपालिका के लिए समान विचार और अत्यंत सम्मान का भाव रखते हैं। ब्रिटेन में अकसर सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला दिया जाता है।’

देश में लंबित मुकदमों की संख्या पर चिंता जाहिर करते हुए रिजिजू ने कहा, ‘जिस समय मैंने कानून मंत्री का पद संभाला था उस समय लंबित मुकदमों की संख्या चार करोड़ से नीचे थी। आज यह पांच करोड़ के करीब है। यह हम सभी के लिए गंभीर चिंता का विषय है।’

कानून मंत्री ने कहा कि यह स्थिति न्याय प्रदान में अक्षमता या सरकार से समर्थन में कमी के कारण पैदा नहीं हुई है। यदि कुछ कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो लंबित मुकदमों की संख्या बढ़ती ही जाएगी।

रिजिजू ने कहा, ‘ब्रिटेन में हर न्यायाधीश एक दिन में अधिकतम तीन से चार मामलों का फैसला सुनाते हैं। लेकिन भारतीय अदालतों में हर न्यायाधीश हर दिन औसतन 40 से 50 मामलों को देखते हैं। मैं महसूस करता हूं कि वे ज्यादा समय तक बैठ रहे हैं। लोग गुणवत्तापूर्ण फैसले की अपेक्षा रखते हैं। न्यायाधीश भी मनुष्य हैं।’

केंद्रीय मंत्री ने इंटरनेट मीडिया और प्रिंट मीडिया में न्यायाधीशों के बारे में टिप्पणियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इंटरनेट मीडिया के इस युग में मुद्दे की गहराई में गए बगैर हर कोई अपनी राय व्यक्त कर रहा है। लोग सीधे निष्कर्ष पर पहुंच जाते हैं और न्यायाधीश पर निजी फैसला सुना देते हैं।

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