छत्तीसगढ़बिलासपुर

सीएमएचओ पद से डॉ प्रमोद महाजन को…”खो” करने के पीछे…किसने बिछाए साजिश के मोहरे..!

(शशि कोन्हेर) : बिलासपुर – सी एम एच ओ डॉ प्रमोद महाजन आखिरकार हटा दिए गए ।बड़ा सवाल यह है कि डॉक्टर महाजन से कौन लोग खफा थे और किसकी दुकानदारी बंद हो गई थी? डॉ प्रमोद महाजन अब सिर्फ संयुक्त संचालक स्वास्थ्य का काम देखेंगे ।

कभी गुरु चेला के रूप में स्वास्थ्य विभाग में चर्चित दो बंदे जिनको डॉ प्रमोद महाजन ने तबादले के बाद तत्काल रतन पुर और जिला चिकित्सालय के लिए रिलीव किया था यह दोनों बंदे जिन पर कई तरह के गंभीर आरोप भी रहे है और इसी के चलते इन दोनो गुरु चेले का तबादला भी हुआ था के बारे में इस बात की काफी चर्चा है कि इन दोनों ने ही मिलकर ऐसा ऐसा चक्कर चलाया कि डॉ प्रमोद महाजन की जगह डॉ अनिल श्रीवास्तव को सीएमएचओ का प्रभार मिल गया कुछ लोग यह भी कयास लगा रहे हैं।

कि कांग्रेसी नेताओं से हुए विवाद के चलते डॉ प्रमोद महाजन को सीएमओ पद गवानी पड़ी लेकिन इस कयास पर इसलिए गंभीरता पूर्वक सोचना नहीं चाहिए क्योंकि डॉ प्रमोद महाजन अभी भी बिलासपुर में संयुक्त संचालक स्वास्थ्य के पद पर बने रहेंगे अगर राजनीतिक विवाद की स्थिति होती तो उन्हें जिले से बाहर जाना पड़ जाता ।

इस उलटफेर में एक महत्वपूर्ण तथ्य है कि चक्कर चलाने वाले में माहिर गुरु और चेले की फिर से बैठकी शुरू हो जाएगी और स्वास्थ्य विभाग के नीतिगत निर्णय के लिए ये दोनो सर्वे सर्वा भी ।पिछले एक माह से जिस बात का अनुमान लगाया जा रहा था आखिर वही हुआ , सुपर सीएमओ कहलाने वाले बंदे को तबादला होने पर जे डी कार्यालय से रिलीव कर जिला अस्पताल भेज ने के 15 दिन बाद ही कुछ ऐसा चक्कर चलाया गया कि जे डी को मंहगा पड़ गया उन्हे सीएम एच को पद से हटा दिया गया ।

उनकी जगह रतनपुर में पदस्थ डॉ. अनिल श्रीवास्तव को अस्थाई रूप से सीएमएचओ की जिम्मेदारी देते हुए बिलासपुर बुला लिया गया ।

बिलासपुर में स्वास्थ्य विभाग में एक बड़ी सर्जरी हुई ज़रूर है मगर इस सर्जरी के पीछे किसका हांथ है यह यक्ष प्रश्न हो गया है क्योंकि डॉक्टर प्रमोद महाजन के सीएम एच ओ की कुर्सी खिसकाने की क़वायद स्वास्थ्य विभाग के सुपर सीएमओ कहे जाने वाले विजय सिंह के जिला अस्पताल रिलीव क़िये जाने के बाद शुरू हो गई थी।

ज्ञात हो कि विजय सिंह नेत्र सहायक के पद पर तो कार्यरत है जिनकी नियुक्ति जिला अस्पताल में थी लेकिन वह सरकंडा सीमाएचओ कार्यालय में रहकर नर्सिंग होम एक्ट के प्रभारी डॉ. अनिल श्रीवास्तव के सहयोगी के रूप में काम करने लगे थे । जिनपर प्राइवेट नर्सिंग होम संचालको से वसूली करने के लगातार आरोप लग रहे थे । यही नही विजय सिंह का सीएमओ कार्यालय में सीएमओ से ज्यादा वर्चस्व था ।

सीएमओ की भी उनपर हुक्म नही चलती थी जिनके जानकारी के बगैर डॉक्टर कर्मचारी कोई काम नही करते थे , इन्ही बातों को लेकर सीएमओ डॉ.प्रमोद महाजन और विजय सिंग के बीच तना तनी चल रही थी।इतना ही नहीं वसूली और अन्य काम के एवज़ में जमकर वसूली अभियान चल रहा था।

गुप्त शिकायतों के आधार पर सीएमएचओ डॉ महाजन ने अपने कार्यालय से डॉक्टर अनिल श्रीवास्तव को रतनपुर ओर विजय सिंह को जिला अस्पताल रिलीव कर दिया।जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग में दबी जुबान से बातें हो रही थी कि विजय सिंह को हटाने का खामियाजा जल्द ही डॉ.प्रमोद महाजन को उठाने पड़ेगा ओर बातें सच साबित हुई सुपर सीएमओ को कार्यालय से रिलीव कर जिला अस्पताल भेज ने के कुछ ही दिन बाद सीएमओ को पद से हटा दिया ।

उनकी जगह पूर्व नर्सिंग होम एक्ट प्रभारी डॉ. अनिल श्रीवास्तव को अस्थाई सीएमओ की जिम्मेदारी दी गई है। इस बात से साफ़ ज़ाहिर है कि रिलीव हुए डॉक्टर एवं सहायक की पहुँच ऊँची है इसलिए डॉक्टर अनिल श्रीवास्तव को सीधे सीएमओ के पद में बैठा दिया है इनके सीएमओ बनते ही यहां से खिसकाए गये एक महानुभाव का सीएमओ कार्यालय आने का रास्ता आसान हो गया है। 

एक औसत पद पर रहने के बावजूद  स्वास्थ्य विभाग में इनका जलवा किसी आला अफ़सर से कम नही है सीएमओ कार्यालय में इनकी तूती बोलती है उनकी हुक्मारानी के आगे सीएमओ की भी नही चलती थी ।नतीजा सामने है जिन्हें अपने ऊँची पहुँच से सीएमओ को ही पद से हटवा दिया ।

लेकिन सवाल यह है कि आख़िर इन वसूली बाजों को संरक्षक देने वाले कौन हैं?
माना जाता है कि ये दोनों राम और श्याम की भूमिका निभाते है डॉ.अनिल श्रीवास्तव और विजय सिंह के रिलीव के बाद सीएमओ डॉ प्रमोद महाजन एक्शन मोड में थे। जो लगातार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं अस्पतालों का निरीक्षण कर रहे थे ।इस दौरान उन्होंने ग़ैरहाज़िर पाये जाने वालों के ख़िलाफ़ कार्यवाही कर रहे थे।

अधिकारियों को प्रमोद महाजन का यह रूप पसंद नही आ रहा था ।अभी कुछ दिन पहले जिला अस्पताल के 9 चिकित्सको को ड्यूटी पर उपस्थित नही रहने पर उन्होंने नोटिस जारी कर स्वास्थ्य अमले में खलबली मचा दी थी जिसका असर यह हुआ कि दूसरे ही दिन जिला अस्पताल में सारे चिकित्सक 15 मिनट पहले ही ड्यूटी पर आ गए थे।इधर डॉ महाजन के जाते ही जिला मुख्यालय में फिर से नेत्र सहायक का कब्जा जमाने की बात कही जा रही है।

यह बात पूरे बिलासपुर को याद है कि कोविड-19 के प्रथम और द्वितीय दौड़ में बिलासपुर में आम जनता की सेवा में जिन अधिकारियों ने रात दिन एक कर दिया था उन्हें डॉक्टर प्रमोद महाजन भी प्रमुख रूप से शामिल थे। अब ऐसे कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी को चंद लगुओं भगुओं के कारण इस तरह अपमानित करना कतई अच्छा नहीं कहा जा सकता।

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