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सावधान रहें और ऐसे इलाकों में जाने से बचें….कनाडा जाने वालों के लिए भारत की एडवाइजरी

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(शशि कोन्हेर) : यदि आप कनाडा में रहते हैं या फिर जाने का प्लान कर रहे हैं तो सावधान रहें। ऐसे इलाकों में जाने से बचें, जहां आपको निशाना बनाया जा सकता है। भारत सरकार ने कनाडा जाने वाले लोगों के लिए यह एडवाइजरी जारी की है। विदेश मंत्रालय ने जारी बयान में कहा कि कनाडा में डिप्लोमैट्स और भारतीय समुदाय के लोगों पर हमले की घटनाएं हुई हैं, जिन्होंने ऐंटी इंडिया एजेंडा का विरोध किया था। इसलिए भारतीय लोगों को सलाह दी जाती है कि वे ऐसे स्थानों पर जाने से बचें या फिर न ही जाएं, जहां ऐसी घटनाएं हुई हैं। यही नहीं मंत्रालय ने कहा कि कनाडा में हमारा उच्चायोग और कौंसुलेट दफ्तर भारतीय नागरिकों के संपर्क में रहेंगे ताकि उनकी सुरक्षा और कुशलता तय की जा सके।

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मंत्रालय ने कहा, ‘हाल ही में भारतीय डिप्लोमैट्स और भारतीय समुदाय के एक वर्ग के लोगों को धमकियां दी गई थीं, जिन्होंने भारत विरोधी एजेंडे की मुखालफत की थी। इसलिए भारतीय मूल के लोगों को सलाह दी जाती है कि वे ऐसे इलाकों में न जाएं, जहां पर ऐसी घटनाएं हुई हैं या फिर ऐसी वारदातों की आशंका हो।’

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इससे पहले मंगलवार को कनाडा ने इस तरह की एडवाइजरी भारत यात्रा को लेकर जारी की थी। उसने अपने नागरिकों को दी गई एडवाइजरी में कहा था कि वे जम्मू-कश्मीर जाने से बचें। इसके पीछे उसने एक नया एजेंडा चलते हुए कहा था कि वहां पर सुरक्षा की स्थिति अनिश्चित है।


उसकी इस एडवाइजरी को भारत से बिगड़ते संबंधों की एक नई कड़ी के तौर पर देखा गया था। इससे पहले उसने भारत के एक अफसर को देश छोड़ने की सलाह दी थी। इसके बाद भारत ने भी उसके एक अधिकारी को 5 दिन के अंदर देश से निकलने को कहा था। दोनों देशों के बीच इस तनाव की शुरुआत सोमवार से हुई थी। जब कनाडा ने भारतीय अधिकारी को देश से निकलने को कहा था। वहीं कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने कहा था कि खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंसियों का साथ था।

बता दें कि दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव के चलते कनाडा में रह रहे भारतीय मूल के छात्र भी आशंकित हैं। कनाडा में कुल 2 लाख 30 हजार भारतीय छात्र रहते हैं और 7 लाख एनआरआई हैं। गौरतलब है कि भारत और कनाडा में तनाव के बीच खालिस्तानी संगठन सिख्स फॉर जस्टिन ने हिंदू समुदाय के लोगों को कनाडा छोड़ने की धमकी दी है। इसके बाद आशंकाएं बढ़ गई हैं कि भारतीय मूल के लोगों को अतिवादी टारगेट कर सकते हैं। ऐसी घटनाओं का पहले भी भारत विरोध कर चुका है।

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