सैनिटाइजर और मास्क की कालाबाजारी, मेडिकल स्टोर में स्वास्थ्य विभाग की छापामार कार्यवाही

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बिलासपुर हम भारतीयों का राष्ट्रीय चरित्र भी बेहद निम्न दर्जे का है। जहां अन्य देशों में राष्ट्रीय आपदा के समय नागरिक समर्पित होकर राष्ट्र और नागरिकों की मदद में अपना सब कुछ लूटा देता हैं। वही भारत में ऐसे मौके पर मुनाफाखोरी की प्रवृत्ति चरम पर होती है। ऐसा ही कुछ महामारी कोरोना वायरस के प्रकोप के दौरान भी नजर आ रही है। चीन से दुनिया भर में फैले कोरोना वायरस का इलाज अब तक सामने नहीं आ पाया है, चिकित्सक सुरक्षा को ही सर्वोपरि प्रयास बता रहे हैं, लिहाजा बार-बार हाथ धोने या फिर हैंड सेनीटाइजर इस्तेमाल करने के साथ बचाव के लिए फेस मास्क लगाने की सलाह दी जा रही है। इसी सलाह के साथ दुकानों में सैनिटाइजर और फेस मास्क की कालाबाजारी आरंभ हो चुकी है। 10 से ₹15 में मिलने वाले मास्क को आउट ऑफ स्टॉक बताकर अनाप-शनाप कीमत में बेचा जा रहा है। आरोप है कि जिस मास्क पर 15 से ₹25 एमआरपी प्रिंट है उसे भी शातिर व्यापारी मिटाकर उसे 50 और ₹100 में बेच रहे हैं। जिस 100 ml सैनिटाइजर की कीमत ₹30 थी उसे 150 से 200 रु में बेचा जा रहा है। जानकार आरोप लगा रहे हैं कि स्वास्थ्य विभाग और ड्रग कंट्रोल विभाग की मिलीभगत से ही मेडिकल स्टोर को कालाबाजारी का मौका मिल रहा है। इन आरोपों के बाद जागे विभाग के अधिकारियों ने रविवार को बिलासपुर के कई क्षेत्रों में मेडिकल स्टोर में छापामार कार्यवाही की। स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर किए गए इससे कारवाही में हालांकि औपचारिकता ही पूरी की गई। मेडिकल स्टोर को निर्देश दिए गए कि वे अधिक कीमत पर मास्क और सैनिटाइजर ना बेचे, लेकिन सच्चाई तो यह है कि पूरे बाजार से मास्क और सेनीटाइजर लगभग गायब है और जो दुकानदार इसे उपलब्ध करा रहे हैं वे इसकी मुंह मांगी कीमत वसूल रहे हैं । आपदा के समय दुकानदारों का यह चरित्र हैरान करने वाला है, जिस पर प्रशासनिक सख्ती की आवश्यकता है।

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