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हिंदू नाम का कोई धर्म नहीं….स्वामी प्रसाद मौर्य बोले- यह केवल ब्राह्मणों का धोखा

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(शशि कोन्हेर) : अपने बयानों के लिए चर्चा में रहने वाले सपा महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य ने अब कहा है कि हिंदू नाम का कोई धर्म ही नहीं है। यह केवल धोखा है। उन्होंने यहां तक कहा कि सही मायने में यह ब्राह्मण धर्म है। स्वामी प्रसाद ने कहा कि ब्राह्मणवाद की जड़ें बहुत गहरी हैं और सारी विषमता का कारण भी ब्राह्मणवाद ही है।ब्राह्मण धर्म को हिंदू धर्म कहकर इस देश के दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों को अपने धर्म के मकड़जाल में फंसाने की एक साजिश है। स्वामी प्रसाद मौर्य लखनऊ में अर्जक संघ के संस्थापक महामना रामस्वरूप वर्मा की जयंती शताब्दी समारोह पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे।

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मौर्य ने कहा कि अगर हिंदू धर्म होता तो आदिवासियों का भी सम्मान होता, दलितों का भी सम्मान होता, पिछड़ों का भी सम्मान होता, लेकिन क्या विडंबना है कि आजादी के 75 साल होने पर अमृत महोत्सव मनाया इसके बाद भी देश की प्रथम नागरिक राष्ट्रपति दौपद्री मुर्मु को मंदिर में अपमान का घूंट पीना पड़ा है। जबकि उन्हीं के अधीन मंत्रिमंडल का एक मंत्री मंदिर के गर्भगृह में जाकर दर्शन करता है। क्योंकि ऊंची जाति का है। द्रौपती मुर्मु को इसलिए रोक दिया जाता है कि आदिवासी समाज की हैं। अगर आदिवासी समाज हिंदू होता तो उनके साथ यह व्यवहार होता क्या।

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कहा कि ब्राह्मणी व्यवस्था के चतुर चालाक लोग आज भी हमें आदिवासी मानते हैं। इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जब ब्रह्मा मंदिर गए तो उन्हें सीढ़ी पर रोक दिया गया। क्योंकि वह दलित समाज के थे। दलित-आदिवासी समाज के लोग धोखे में मत रहना। तुम उनके लिए खून बहा दो लेकिन वह तुम्हें सम्मान नहीं देंगे, क्योंकि वह तुम्हें नीच मानते हैं।

कहा कि जब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री पद से हटे तो यही सत्ता में बैठे लोगों ने मुख्यमंत्री आवास को पहले गौमूत्र से धोया, फिर उसे गंगा जल से धोया। अगर अखिलेश यादव ब्राह्म्ण समाज के होते तो किसी की हिम्मत होती मुख्यमंत्री आवास को इस तरह धोने की। आदिवासी, दलित पिछड़े कौन हैं? यह वहीं शूद्र हैं जिन्हें पहले जानवरों से भी बदतर जीवन जीने के लिए मजबूर किया गया था।

स्वामी प्रसाद ने कहा कि ऐसे लोगों से सावधान रहना। इनके लिए तुम खून बहा देते हो, हिंदू के नाम पर दंगे में शामिल हो जाते हो। ये तुम्हारी नादानी है। जिसे आप धर्म मानते हो, वह इनका धंधा है। आपके लिए यह धर्म हो सकता है। इनके लिए यह धंधा है। कहा कि हमारे महापुरूषों ने एक लंबा संघर्ष किया, जिसका नतीजा है कि आज हजारों साल की गुलामी से निजात पाकर हम सम्मान और स्वाभिमान के रास्ते पर चल पड़े है।

स्वामी प्रसाद ने कहा कि मैं सोशल मीडिया से जुड़े हुए नौजवानों को भी इस बात के लिए बधाई देना चाहता हूं कि जब मैंने सम्मान-स्वाभिमान की बात को छेड़ी, जब मैंने ब्राह्मणवाद पर चोट किया, जब ब्राह्मणवादी ताकतों की चूलें हिलीं तो उसमें बहुजन समाज का सोशल मीडिया ब्राह्मणवाद के सोशल मीडिया पर भारी पड़ गया। जिस कारण आज भी गांव-गली, चट्टी-चौराहे, चाय की दुकान से लेकर सचिवालय और विश्वविद्यालय तक चर्चा चल रही है, यह एक शुभ संकेत है।

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