शासकीय चरनोई भूमि के आबंटन पर सनातनी हिंदू समाज ने दर्ज कराई आपत्ति.

(भूपेंद्र सिंह राठौर) : बिलासपुर के मोपका क्षेत्र में शासकीय चरनोई भूमि को कब्रिस्तान के लिए आवंटित करने के फैसले पर विवाद खड़ा हो गया है। सनातनी हिंदू समाज ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे सार्वजनिक हितों के खिलाफ बताया है। समाज के सदस्यों ने अधिवक्ता निखिल शुक्ला के माध्यम से तहसीलदार बिलासपुर को आपत्ति पत्र सौंपा है।
क्या सरकार सार्वजनिक चरनोई भूमि को एक समुदाय विशेष को सौंप सकती है? इसी मुद्दे पर बिलासपुर के मोपका क्षेत्र में विवाद खड़ा हो गया है। सनातनी हिंदू समाज ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। आपत्ति दर्ज कराने वालों में गोपाल तिवारी, पुखराज, प्रवीण गुप्ता, अभिषेक ठाकुर, युवराज तोड़ेकर, आकाश सरकार, प्रिंस वर्मा, राजा पांडेय, मनीष वर्मा, काली मिश्रा, अविनाश मोटवानी और ओंकार कश्यप शामिल हैं। आपत्तिकर्ताओं का कहना है कि यह भूमि निस्तार पत्रक में चराई भूमि के रूप में दर्ज है और स्थानीय पशुधन के लिए उपयोग की जाती रही है। बिना उचित प्रक्रिया अपनाए इसे किसी विशेष समुदाय को आवंटित करना ग्रामवासियों के अधिकारों का उल्लंघन होगा। समाजिक कार्यकर्ता प्रिंस वर्मा ने बताया कि हमने तहसीलदार को स्पष्ट रूप से बताया है कि यह भूमि चरनोई के लिए आरक्षित है। यदि इसे अवैध रूप से आवंटित किया गया तो हम न्यायालय में कानूनी चुनौती देंगे। सनातनी हिंदू समाज ने प्रशासन से इस आवंटन को तत्काल रद्द करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी आपत्ति पर विचार नहीं किया गया तो वे कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या शासकीय चरनोई भूमि को इस तरह आवंटित किया जा सकता है? देखना होगा कि प्रशासन इस आपत्ति पर क्या फैसला लेता है।




