बिलासपुर

अंधकार में रहा शहर, बिजली विभाग की कार्यप्रणाली से जनता हुई त्रस्त…..

(भूपेंद्र सिंह राठौर) : बिलासपुर शहर एक रात नहीं, बल्कि एक सिस्टम की विफलता से जूझता रहा। शनिवार की शाम बिलासपुरवासियों के लिए काले अनुभव की तरह आई। तेज हवाएं, गरजते बादल और मूसलधार बारिश ने मानो पूरे शहर को हिला कर रख दिया। करीब 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली आंधी ने पेड़ों और बिजली के खंभों को गिराया, जिससे विद्युत व्यवस्था कि पोल खुल गई।

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तेज हवाओं और बारिश के साथ जैसे ही मौसम बदला शहर के अधिकांश इलाकों में बिजली सप्लाई एक झटके में ठप हो गई। लोग उस समय यह समझ ही नहीं पाए कि क्या हुआ, और देखते ही देखते बिलासपुर अंधेरे में डूब गया। रातभर लोग बिजली आपूर्ति बहाल होने का इंतजार करते रहे। गर्मी, मच्छर और अंधेरे के बीच बीती यह रात किसी भी आधुनिक शहर के लिए शर्मनाक तस्वीर थी।

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मोबाइल चार्ज नहीं, इनवर्टर जवाब दे चुके थे और बिजली विभाग पूरी तरह से लापता। बारिश थमते ही लोगों ने बिजली दफ्तर और अधिकारियो के नंबर पर फोन मिलाना शुरू किया। लेकिन ना कोई कॉल रिसीव हुई, ना कोई जवाब मिला। लोगों कि रात उम्मीद मे बीत गई मगर गुल बिजली नही आयी. कई इलाकों मे अगले दिन रविवार शाम तक तक सुधार कार्य चल रहा था,परेशान लोग बिजली ऑफिस पहुंचे तो वहाँ भी सन्नाटा पसरा हुआ था।आक्रोशित नागरिकों ने जब सवाल उठाए, तो कर्मचारियों के पास न तो कोई स्पष्टीकरण था और न ही कोई समाधान। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई, बीमारों की तकलीफ बढ़ी, और बुजुर्ग पूरी रात बेचैन रहे।

सवाल ये है क्या बिजली विभाग के पास आपदा प्रबंधन की कोई ठोस योजना नहीं है? हर बार आंधी-पानी के नाम पर लापरवाही क्यों छिपाया जाता है?
क्या सिस्टम की तैयारी सिर्फ कागजों में है?गौर करने वाली बात ये है कि ये पहली बार नहीं हुआ है। पिछले साल भी कई मौकों पर थोड़ी सी बारिश के बाद पूरा शहर अंधेरे में डूबा था। लेकिन ना कोई जांच हुई, ना कोई सजा तय की गई। अब सवाल ये है कि कब तक जनता ऐसी लापरवाही की कीमत चुकाती रहेगी.

 

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