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‘पाकिस्तान सबक सीख चुका है’, बोले शहबाज शरीफ, प्रधानमंत्री मोदी से की अपील, ‘चलिए बैठकर बात करते हैं’

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(शशि कोन्हेर) : पाकिस्तान इन दिनों आर्थिक बदहाली के दौर से गुजर रहा है. हालत यह है कि वहां लोगों को खाने का आटा नहीं मिल पा रहा है. इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का एक बयान सामने आया है जिसमें पड़ोसी देश के सुर बदले-बदले नजर आ रहे हैं. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान अपना सबक सीख चुका है और अब वह शांति से रहना चाहता है.

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पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने अल अरबिया को दिए इंटरव्यू में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हर समस्या से बातचीत के लिए तैयार होने की बात भी कही है. शाहबाज शरीफ ने कहा भारतीय नेतृत्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करता हूं कि हमें बातचीत की मेज पर बैठकर हर मुद्दे को हल करने की कोशिश करनी चाहिए.

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सबक सीख चुका पाकिस्तान- शाहबाज
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने भारत के साथ संबंधों को सुधारने की वकालत करते हुए कहा, ”हम पड़ोसी हैं. यह हमारे ऊपर है कि हम शांति से रहें. प्रगति करे या फिर एक दूसरे से लड़ाई करें और समय-संसाधनों को बर्बाद करें.” उन्होंने आगे कहा, ”हम भारत के साथ तीन युद्ध लड़ चुके हैं और यह हर बार और कंगाली, गरीबी और लोगों के लिए बेरोजगारी लाया है. हम अपना सबक सीख चुके हैं और हम शांति से रहना चाहते हैं.”

बातचीत का संदेश
शहबाज शरीफ ने कहा, ”हम हमारी प्रॉब्लम सॉल्व करने को तैयार हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मेरा संदेश है कि चलिए बैठते हैं और बात करते हैं. पाकिस्तान नहीं चाहता कि हम हमारे संसाधनों को बम और बारूद बनाने में खर्च करें.”

युद्ध को बताया विनाशकारी
शरीफ ने परमाणु शक्ति होने का हवाला देते हुए युद्ध को किसी के लिए भी ठीक नहीं होने की बात कही. उन्होंने कहा, “हम परमाणु शक्तियां हैं, हथियारों से लैस हैं और अगर भगवान न करे कि युद्ध छिड़ जाए तो जो हुआ उसे बताने के लिए कौन जीवित रहेगा. मैंने प्रेसिडेंट मोहम्मद बिन जायद से कहा है कि आप भारत और पाकिस्तान के बीच अहम रोल अदा कर सकते हैं.”

पाकिस्तान लड़ चुका है तीन युद्ध
पाकिस्तान तीन बार भारत से सीधा युद्ध लड़ चुका है और तीनों बार उसे मुंह की खानी पड़ी है. भारत और पाकिस्तान के बीच पहली जंग 1965 में हुई थी. उस समय भारत के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री थे और पाकिस्तान में जनरल याह्या खान के नेतृत्व में सैन्य शासन था. भारतीय सेना पाकिस्तान पर कहर बनकर टूटी थी. ताशकंद समझौते के बाद ये युद्ध खत्म हुआ था.

भारत-पाकिस्तान के बीच दूसरी जंग 1971 में हुई थी. इस जंग में पाकिस्तान को ऐसी शर्मनाक हार मिली थी जिससे वह आज तक नहीं उबर पाया है. 71 की जंग में पाकिस्तान के दो टुकड़े हो गए थे और बांग्लादेश बना था. इस जंग में भारत ने अमेरिका जैसी महाशक्ति के दबाव को ठुकरा दिया था. जंग में पाकिस्तान के 90 हजार सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया था. इसके बाद भारतीय सैन्य रणनीति की पूरी दुनिया में तारीफ हुई.

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तीसरा युद्ध पाकिस्तान ने 1999 में कारगिल में छेड़ा था. इस दौरान पाकिस्तानी सैनिक सर्दियों के मौसम में चुपके से आकर चोटियों पर बैठ गए थे. बाद में भारत ने बड़ा अभियान चलाकर सभी चौकियों पर कब्जा करते हुए पाकिस्तान को एक बार फिर आइना दिखाया था. पहले तो पाकिस्तान इस युद्ध में अपने सैनिकों के होने से भी इनकार करता रहा था लेकिन बाद में उसके नेतृत्व ने माना कि यह उस समय के जनरल परवेज मुशर्रफ के दिमाग की उपज थी. मुशर्रफ को उम्मीद थी कि पाकिस्तानी सेना भारत से ये इलाका छीन लेगी लेकिन भारत के वीर जवानों ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया।

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