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अल अक्सा मस्जिद” पर मुस्लिम देशों की आपात बैठक पर, इसराइल ने ऐसा क्यों कहा कि उसे इसकी परवाह नहीं है…?

(शशि कोन्हेर) : इजरायल के विदेश मंत्री के अल अक्सा मस्जिद जाने को लेकर मुस्लिम वर्ल्ड में तीखी प्रतिक्रिया हो रही है। इस मामले पर मुस्लिम देशों की आपात बैठक को लेकर इजरायल के राजदूत गिलाद एर्दन ने कहा कि ये आपातकालीन बैठक ‘गैर-जरूरी’ है. उन्होंने कहा कि विश्व में अनगिनत सुरक्षा स्थितियों, ईरान में अयातुल्ला खामेनेई के क्रूर शासन आदि के खिलाफ बैठकें होना चाहिए.

उन्होंने बेन-गिवीर के दौरे को संक्षिप्त, शांतिपूर्ण और वैध बताया. उन्होंने कहा कि उनकी यात्रा यथास्थिति के अनुसार थी और जो कोई भी इससे अलग दावा कर रहा है वो केवल स्थिति को भड़का रहा है.

उन्होंने फिलिस्तीन पर ही यथास्थिति को बदलने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘इजरायल ने यथास्थिति को नुकसान नहीं पहुंचाया है और ऐसा करने की कोई योजना नहीं है. बल्कि फिलिस्तीन ने ही अल-अक्सा पर खतरे का झूठा दावा कर परिसर को युद्ध के मैदान में बदला, हथियार जमा किए, उकसाने और झूठे दावों के माध्यम से हिंसा को बढ़ावा दिया है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘फिलिस्तीन के अधिकारी कह रहे हैं कि टेंपल माउंट (यहूदियों की सबसे पवित्र पूजा स्थल) में न तो यहूदी प्रार्थना कर सकते हैं और न ही वहां उनकी उपस्थिति को बर्दास्त किया जाएगा. ये यथास्थिति को बदलने जैसा है. ये कदम शुद्ध यहूदी-विरोधी है. इस संस्था (UN) और विशेष रूप से सुरक्षा परिषद को, फिलिस्तीनी झूठ को वैध बनाना बंद करना चाहिए.’

क्या बोला यूएई?

संयुक्त अरब अमीरात के उप स्थायी प्रतिनिधि, मोहम्मद अबुशहाब ने इजरायली सुरक्षाबलों के साथ बेन-गिवीर की अल-अक्सा मस्जिद परिसर के दौरे की कड़ी निंदा की. अबुशहाब ने कहा, ‘इस तरह की भड़काऊ कार्रवाइयां दिखाती हैं कि इजरायल यरूशलम के पवित्र स्थलों की मौजूदा ऐतिहासिक और कानूनी स्थिति के प्रति कितना गैर-जिम्मेदार है. इससे कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों की नाजुक स्थिति और अस्थिर हो रही है. ऐसी कार्रवाईयों से नफरत और बढ़ेगी.’

उन्होंने जोर देकर कहा कि मध्य-पूर्व की शांति के लिए इस मसले का टू-नेशन सॉल्यूशन निकाला जाना चाहिए.

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