बिलासपुर

जरा देखे VIDEO… आखिर नगर निगम नाकारा हो चुके अपने अतिक्रमण (बेजा कब्जा) विरोधी दस्ते को भंग क्यों नहीं करती..? देखिए…जहां खड़ा है दस्ते का काऊकेचर…वही फैले हैं बेजा कब्जाधारी..!

(शशि कोन्हेर) : बिलासपुर।। ऐसा लगता है कि बिलासपुर नगर निगम का अतिक्रमण विरोधी दस्ता अब पूरी तरह नाकारा और फालतू हो चुका है। बेजा कब्जाधारियों को इससे कोई डर नहीं लगता। इस दस्ते का डर ही खत्म हो गया है। शायद यही वजह है कि सुबह अतिक्रमण विरोधी टीम जिस जगह का बेजा कब्जा हटाती है। शाम तक या कहें दोपहर तक ही सभी बेजा कब्जा धारी अपनी जगह पर फिर से काबिल हो जाते हैं। हम यहां आपको (देखें फोटो वीडियो) ऐसा नजारा दिखा रहे हैं… नगर निगम जिस काऊकेचर में बेजा कब्जा धारियों का सामान जप्त कर ले जाती है। वह राघवेंद्र राव सभा भवन के सामने सड़क पर ऐसी जगह खड़ा है जिसके आजू-बाजू दूर तक बेजा कब्जा धारियों ने सड़क के किनारे बेजा कब्जा कर अपनी दुकानें फैला रखी हैं।

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अतिक्रमण विरोधी टीम के लोग भी इसी काऊकेचर के आसपास आजू-बाजू आगे-पीछे चाय-पानी और जुगाड़ मुगाड़ कर रहे हैं। लेकिन न तो उन्हें बेजा कब्जा धारियों पर गुस्सा आ रहा है और ना ही बेजा कब्जा करने वालों को उनका कोई डर ही लग रहा है। ऐसा लगता है कि जिस तरह होमगार्ड के जवान से आम तौर पर ग्रामीण तक नहीं डरते। ठीक वही हालत नगर निगम के अतिक्रमण विरोधी टीम की हो गई है। इस टीम को सब पता है कि कहां-कहां कौन-कौन बेजा कब्जा कर रहा है। लेकिन यह सख्त कार्रवाई करने की जगह दिखावे के तौर पर कार्रवाई करती है। यही वजह है कि जिस जगह इसकी कार्रवाई होती है वह जगह कुछ ही देर में बेजा कब्जा धारियों से फिर आबाद हो जाती है। जानकारी मिली है कि नगर निगम अतिक्रमण दस्ते में एक अधिकारी और उसके सहायकों के अलावा लगभग 25 कर्मचारी शामिल हैं। इतने बड़े अतिक्रमण विरोधी दस्ते के बावजूद यदि बिलासपुर शहर में बेजा कब्जा बढ़ता जा रहा है तो ऐसे नाकारा अतिक्रमण विरोधी दस्ते को भंग कर देना चाहिए। और बेजा कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कोई नई वैकल्पिक व्यवस्था करने पर विचार करना चाहिए।

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जरा सोचिए.. नगर निगम के मुख्यालय से मात्र कुछ ही दूर स्थित बृहस्पति बाजार, कंपनी गार्डन, कुदुदंड, सरकंडा जरहाभाटा चौक, मगरपारा, मध्य नगरी चौक और ईदगाह चौक समेत अनेक स्थानों पर जिस तरह से बेजा कब्जा धारियों ने सड़कों पर स्थाई रूप से कब्जा जमा लिया है। वह साफ बता रहा है कि अतिक्रमण विरोधी दस्ता या तो बेजा कब्जा के खिलाफ दिखावे कार्रवाई का आदी बन गया है…या फिर बेजा कब्जा करने वालों से कुछ लेनदेन कर उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही ना करने की गारंटी दे रहा है। जाहिर है कि ऐसे नाकारा अतिक्रमण विरोधी दस्ते को भंग कर उसका ठीक उसी तरह नए सिरे से गठन करना चाहिए…जैसा पुलिस के बड़े अधिकारी क्राइम ब्रांच के साथ किया करते हैं।

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