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राहुल गांधी के अमेठी और सोनिया गांधी के रायबरेली लोकसभा क्षेत्र में…!

(शशि कोन्हेर) : लखनऊ – अमेठी और रायबरेली के नाम पर कांग्रेस कभी घमण्ड किया करती थी लेकिन अब बदलते हालात में कांग्रेश के लिए इन दोनों ही जिलों की विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। यूपी में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पहले चरण से चला विधानसभा चुनाव अब अवध क्षेत्र में पहुंच गया है। इसी क्षेत्र में कभी कांग्रेस के गढ़ रह चुके दोनों जिले अमेठी और रायबरेली भी हैं। यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगा कि कांग्रेस भले ही प्रदेश के 399 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव लड़ रही है लेकिन उसकी असली कसौटी तो रायबरेली और अमेठी जिलों की सीटें ही होंगी।‌ इन दो जिलों की कुल विधानसभा सीटों में से कितनी सीटों पर कांग्रेश अपनी जीत का परचम लहराती है उस पर सभी की नजरें बनी हुई हैं। बीते 3 सालों से उत्तर प्रदेश में सक्रिय प्रियंका गांधी वाड्रा की सफलता भी इस चुनाव में दांव पर लगी हुई है। कांग्रेस ने वैसे तो 399 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं लेकिन अमेठी और रायबरेली की सीटें जीतना उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।

गांधी-नेहरू परिवार के साथ अमेठी और रायबरेली ये दोनों जिले कांग्रेस के गढ़ के रूप में पहचाने जाने रहे हैं। । यह बात और है कि 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अमेठी की चारों सीटें हार गई थी। दो साल बाद कांग्रेस को तब करारा झटका लगा जब लगातार तीन बार यहां से सांसद चुने गए पार्टी नेता राहुल गांधी 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की स्मृति ईरानी से हार गए। लिहाजा अमेठी में कांग्रेस दोहरे दबाव में है। खासकर तब जब उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की कमान पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के हाथों में है। अठारहवीं विधान सभा के चुनाव में कांग्रेस के सामने पहली चुनौती तो यह है कि वह अमेठी में अपना खाता खोलकर अपना अस्तित्व बचाए। और दूसरी चुनौती यह है कि जिले में ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतकर प्रियंका की कप्तानी पर मुहर लगाये। पिछले विधानसभा चुनाव में रायबरेली की मात्र 2 सीटें जीतने वाली कांग्रेस के दोनों विजई विधायक अदिति सिंह और राकेश सिंह अब भगवा खेमे में शामिल होने के बाद बतौर प्रत्याशी कांग्रेस को चुनौती दे रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में अमेठी में झटका खाने के बाद कांग्रेस की पूरी कोशिश होगी कि रायबरेली में इसकी पुनरावृत्ति ना हो। जिससे कांग्रेश अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र में सीटें जीतकर साख को बचाने में कामयाब हो सके। देखना यह है कि कांग्रेस और यूपी विधानसभा चुनाव में उसकी नैया पार लगाने के लिए कमर कस चुकी प्रियंका गांधी वाड्रा अमेठी और रायबरेली में अपना जादू कैसे बिखेरते हैं।

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