छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में  शुरू हुई चर्चा…किसकी टिकट कटेगी… किसकी नहीं कटेगी.. और किसको टिकट मिलेगी..?

(शशि कोन्हेर) : इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए प्रदेश में राजनीति और राजनीति पे चर्चा..दोनों ही तेज हो गई हैं। चुनावी तैयारियों के लिहाज से जनता की नब्ज जानने और कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पूरे 90 विधानसभाओं में भेंट मुलाकात के सिलसिले पर निकल पड़े हैं। वहीं भाजपा ने अपने दो महारथी और कुछ रथी बदल कर कांग्रेस सरकार पर अपने हमले की धार तेज कर दी है। लोगों ने अगली सरकार को लेकर अपने अपने अनुमान और भविष्यवाणियां उगलनी शुरू कर दी है।

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छत्तीसगढ़ में इस समय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की “चाय पे चर्चा” से “टिकट पे चर्चा” का बाजार कहीं अधिक गर्म है। लोग घरों के ड्राइंग रूम में,शहरों और कस्बों के चौक चौराहों तथा नुक्कडों के चाय पान ठेलों में इस बात पर खुलकर चर्चा करते मिल रहे हैं कि आने वाले चुनाव में भाजपा से किसकी टिकट कटेगी और किसकी टिकट नहीं कटेगी.. ऐसी ही चर्चा कांग्रेस को भी लेकर है।

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लेकिन टिकट कटने का आतंक कांग्रेस से कहीं अधिक भाजपा के  नेताओं में दिख रहा है। लोग दावे करने लगे हैं कि इस बार भाजपा के फलां फलां व्यक्ति की टिकट जरूर कटेगी। और प्रदेश की विभिन्न सीटों से कांग्रेस की टिकट किन किस्मत वालों को मिल सकती है। वैसे टिकट कटने की बयार अभी भारतीय जनता पार्टी में कुछ अधिक ही तेजी से बढ़ रही है। भाजपा ने उत्तराखंड में अपने 10 विधायकों के टिकट काटे थे।

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इसके बाद भी पार्टी वहां दोबारा सत्ता में लौट कर आ गई। जबकि हिमाचल प्रदेश में पार्टी ने मंत्रियों सहित 11 विधायकों के टिकट काटे थे। लेकिन पार्टी को वहां कोई फायदा नहीं हुआ। गुजरात में सर्वाधिक 38 विधायकों के टिकट काटे गये। इसके बावजूद वहां से भाजपा बंपर मेजारिटी के साथ चुनाव जीतकर आई। छत्तीसगढ़ में पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अपने सभी सांसदों के टिकट काटकर नए चेहरों को तवज्जो दी थी। और तब प्रदेश के 11 लोकसभा क्षेत्रों में से 9 सीटों पर भाजपा के नए चेहरे, सांसद बनने में सफल रहे। इसलिए टिकट काटने और नही काटने को चुनावी जीत-हार का कोई मुकम्मल फार्मूला नहीं कहा जा सकता।

इसके बाद भी सड़क पर हो रही चर्चाओं में बहुमत ऐसे ही लोगों का है, जो यह दावा कर रहे हैं कि इस बार भाजपा बहुत सारे नए लोगों को टिकट देगी। मतलब पुराने लोगों की टिकट कटेगी। रहा सवाल कांग्रेस का..! तो इस बार लोगों के बीच टिकट दावेदारों को लेकर जमकर चर्चाएं हो रही हैं। यहां तक की कांग्रेस में भी मौजूदा विधायकों की टिकट कटने और नए चेहरों को टिकट मिलने का अनुमान लगाना लोगों ने शुरू कर दिया है।  यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि बीते कुछ चुनावों से भारतीय जनता पार्टी में भी विधानसभा और लोकसभा चुनाव का टिकट वितरण कुछ-कुछ लाटरी जैसा ही हो गया है।

जबकि कांग्रेस में इस विषय पर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी द्वारा कही गई एक बात आज भी खरी उतरती। वे कहा करते थे कि कांग्रेस में विधायक और मंत्री बनने के लिए माथे पर लकीर होना जरूरी है। इसलिए चुनाव को नजदीक आते देख भाजपा की तरह ही कांग्रेस में कई दावेदार अपने हाथ और माथे की लकीरों का रहस्य जानने मौसमी (चुनावी) भविष्यवेत्ताओं के दरवाजे का चक्कर लगा रहे हैं।

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