बेटी ने निभाया अंतिम धर्म, प्रयागराज में किया पिता का पिंडदान

(भूपेंद्र सिंह राठौर) : बिलासपुर – जिले के तखतपुर विकासखंड के ग्राम नगोई की एक बेटी ने समाज की पुरानी परंपराओं को नई सोच के साथ चुनौती दी है। कक्षा 9वीं मे पढ़ रही आस्था कौशिक ने अपने दिवंगत पिता की अंतिम इच्छा पूरी करते हुए प्रयागराज में विधि-विधान से उनका पिंडदान किया। श्रेष्ठी कुर्मी समाज में इस तरह का यह पहला मामला बताया जा रहा है।
ग्राम नगोई निवासी किसान देवनारायण कौशिक का निधन हो गया। परिवार में एक बेटा और दो बेटियां हैं। बेटा छोटा होने के कारण दूसरी बेटी आस्था ने पिता के पिंडदान का दायित्व संभाला। आस्था का कहना है कि उनके पिता हमेशा कहते थे कि उनकी बेटियां ही उनका सबसे बड़ा सहारा हैं और उनका पिंडदान भी बेटी ही करेगी। पिता की इसी अंतिम इच्छा को संकल्प बनाकर उन्होंने प्रयागराज में पूरे विधि-विधान के साथ पिंडदान किया। आस्था बताती हैं कि प्रयागराज में कुछ पुरोहितों ने उनके पिंडदान पर आपत्ति जताई और समाज के कुछ लोगों ने भी विरोध किया। लेकिन परिवार ने पूरा साथ दिया। उनका कहना है कि जब बेटियां माता-पिता की सेवा कर सकती हैं तो अंतिम संस्कार और पिंडदान जैसे धार्मिक दायित्व भी निभा सकती हैं।
यह कदम अब बेटियों को समान अधिकार देने और सामाजिक सोच में बदलाव का संदेश बनकर सामने आया है। आस्था कौशिक का कहना है कि अगर उनके इस कदम से समाज में बेटियों के प्रति सोच बदलती है तो यही उनके पिता के लिए सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी। एक बेटी द्वारा निभाए गए इस अंतिम धर्म की चर्चा अब पूरे बिलासपुर जिले और आसपास के क्षेत्रों में प्रेरणादायी उदाहरण के रूप में की जा रही है।




