बिलासपुर

कानन पेण्डारी जू की दीवारें फिर संकट में….

 

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(भूपेंद्र सिंह राठौर) : बिलासपुर – कानन पेण्डारी जू की सुरक्षा एक बार फिर सवालों के घेरे में है। हर साल बारिश आते ही यहां की बाउंड्रीवाल या तो झुक जाती है या फिर गिर जाती है। इस बार भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। वन विभाग के पास न तो मरम्मत का बजट है और न ही स्थायी समाधान का प्लान।

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कानन पेण्डारी की बाउंड्रीवाल एक बार फिर संकट में है। कई जगहों पर ईंट की दीवारें झुक चुकी हैं। इन दीवारों को बचाने के लिए लकड़ी और पत्थरों का सहारा दिया गया है। ऐसे में सवाल उठता है क्या इतने बड़े जू की सुरक्षा सिर्फ लकड़ियों के सहारे है? बारिश से पहले ही दीवारें झुकने लगी हैं, जबकि पिछले वर्षों में भी यही कहानी दोहराई जाती रही है। मुख्य गेट के पास और हाथियों के बाड़े के पीछे की दीवारें पहले भी कई बार गिर चुकी हैं। नई दीवार की जगह ‘ग्रीन नेट’ लगाकर घेराबंदी कर दी जाती है। यही हाल रेस्क्यू सेंटर की ओर जाने वाले रास्ते का है। गेट नंबर एक के पास बनी सीमेंट की दीवार अब एक ओर झुकने लगी है। इसके नीचे लकड़ी और पत्थर का टेका लगाया गया है ताकि यह बारिश में ढह न जाए। आपको बता दें, कानन पेण्डारी को हाल ही में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण, नई दिल्ली से मीडियम जू की मान्यता मिली है। करीब 114 एकड़ में फैले इस जू में 650 से ज्यादा वन्य प्राणी हैं, लेकिन इनकी सुरक्षा के इंतज़ाम हर साल सवालों में घिरे होते हैं।

जू प्रबंधन ने हालांकि बच्चों के लिए गार्डन, पिकनिक स्पॉट जैसी सुविधाएं तैयार की हैं और तखतपुर रोड की ओर फेंसिंग व पोल लगाकर घेराबंदी की है, लेकिन कई हिस्सों में अभी भी ईंट की दीवार ही एकमात्र सुरक्षा उपाय है वो भी अधूरी और अस्थायी। डीएफओ गणेश यू आर ने बताया कि जू में कई दीवारों की मरम्मत की जरूरत है। सबसे बड़ी चुनौती बजट की है। जब तक बजट नहीं आता, तब तक लकड़ी के टेको से दीवार को गिरने से बचाया जा रहा है।

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