बोर्ड परीक्षा परिणाम के रैकिंग मे बिलासपुर लुढ़का कलेक्टर नाराज,विभाग करेगा समीक्षा

(उषा सोनी) : बिलासपुर – छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षाओं में बिलासपुर जिले का रिजल्ट बेहद खराब रहा। इस परिणाम ने जिले को 90 प्लस लाने के दावे को भी खोखला साबित कर दिया। सत्र 2025-26 के दसवीं 12वीं के परीक्षा परिणाम पर नजर डालें तो 12वीं में जिला 27वें रैंकिंग पर है वहीं 10वीं में 30 वें रैंकिंग पर जा पहुँचा जो बेहद चिंताजनक है। बता दें कि बीते सत्र में जिले की रैंकिग 17 और 19वें पायदान पर थी। जिसमें और सुधार लाने के लिए प्रशासन स्तर पर कई अभियान भी चलाए गए लेकिन हाल ही में छग माशिम द्बारा जारी परीक्षा परिणाम जिसमें दसवीं के 65.30 और 12वीं में आए 79.19 प्रतिशत नतीजों ने जिला प्रशासन और सरकार कि मंशा पर पानी फेर दिया। वर्ष 2024- 25 की बात करें तो 12वीं कक्षा में जिले का प्रदेश में 17वां स्थान था और 10 वीं में 19वां स्थान मिला था। इस बार रिजल्ट के गिरते पायदान ने बिलासपुर जिले को फिसड्डी साबित कर दिया है। जिला शिक्षा अधिकारी विजय तांडे ने भी इस परिणाम पर दुख जताया है और स्कूल स्तर पर इसकी समीक्षा करने की बात कही है।
जिले को 90 प्लस लाने के लिए किए गए प्रयास पर डीईओ टांडे का कहना है कि अपेक्षाकृत परिणाम नही आने का उन्हें दुख है और और प्रशासन ने भी खेद जताया है और रिजल्ट की समीक्षा स्कूल स्तर पर की जाएगी। प्राचार्यो से यह जाना जाएगा कि क्या वजह है, ऐसी क्या चुनौतियां थी जिसकी वजह से अपेक्षा पर खरे नहीं उतर पाए। इसकी विस्तृत जानकारी मंगवा ली है।
दूसरी ओर उनका यह भी कहना है कि जिला शिक्षा कार्यालय ने तीन बार प्राचार्यो की बैठक ली, इसके साथ ही व्याख्याताओं और सीएससी की बैठक ली गई। बैठकों मे उन्हें टिप्स भी दिए, यह प्रयास किया था कि तीमाही और छमाही की परीक्षा में पूरे जिले में एकरूपता हो जिसके तहत खासकर 10 वीं और 12 वीं के बच्चों को बेहतर तैयारी करा सके। अंत में हमने प्रीबोर्ड भी लिया उसके बाद भी इसके बाद भी परिणाम अच्छा नही आया। अब उनका कहना है जिला स्तर पर जो काम होना चाहिए क लगभग सब किया। उसके बाद भी कहीं कुछ कमी रह गई है तो इस समीक्षा के बाद स्पष्ट करेंगे।
जिला शिक्षक अधिकारी विजय टांडे खराब रिजल्ट के पीछे शिक्षकों की एसआईआर और अन्य ड्युटी को भी मानने से इनकार कर दिया और स्पष्ट किया कि बिलासपुर जिला साधन संपन्न जिला है यहां पर सभी प्रकार की सुविधा है। यहां की शिक्षको की ड्युटी भी एसआईआर में बहुँत कम लगी है। उनका मानना कि अच्छा रिजल्ट नही आने के पीछे कहीं न कहीं स्कूल या प्रशासनिक स्तर जिला शिक्षा कार्यालय पर कमी रही होगी।
बता दें कि जिले को 90 प्लस में लाने के लिए विभागीय स्तर पर 90 प्लस की टीम बनाई गई थी। जिसमें प्रत्येक विषयो के विषय विशेषज्ञ शामिल थे। इन विशेषज्ञों के द्बारा बोर्ड परीक्षा के मापदंड के अनुरूप प्रश्न पेपर तैयार कर छात्रों का टेस्ट लिया गया था। इसके अलावा टीचरों को ब्लूप्रिंट की ट्रेनिंग भी दी गई थी। इसके बावजूद परीक्षा परिणाम बेहद निराशाजनक रहा जो जिले में शिक्षा के स्तर को बेहद कमजोर साबित करता है।




