बिलासपुर

जल संरक्षण की दिशा में निरंकारी मिशन का सशक्त कदमः ‘प्रोजेक्ट अमृत’ का चौथा चरण शुरू

(दिलीप जगवानी) : बिलासपुर/जब सेवा साधना बन जाए और प्रकृति के प्रति संवेदना जीवन का मूल मंत्र बने , तब पावन संकल्प जन्म लेते हैं। मानव सेवा और लोक कल्याण की इसी दिव्य चेतना को साकार रूप प्रदान करने हेतु संत निरंकारी मिशन द्वारा ‘प्रोजेक्ट अमृत’ के अंतर्गत ‘स्वच्छ जल, स्वच्छ मन’ अभियान के चैथे चरण का भव्य शुभारंभ रविवार, 22 फरवरी को किया गया।परम श्रद्धेय सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के निर्देशानुसार समस्त भारत में भव्य रूप से इसका आयोजन किया गया।

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बिलासपुर नगर में कल दिनांक को सुबह 07.00 बजे से 09.30 बजे तक में छठ घाट तोरवा मे जोनल इंचार्ज सुन्दर श्याम के सानिध्य में विशेष साफ-सफाई का अभियान चलाया गया। जिसमें बिलासपुर के सेवादल के लगभग 200 सदस्यों ने मिलकर सामाजिक कार्य सम्पन्न किया। साथ ही साथ बिलासपुर जोन अंतर्गत अन्य 08 क्षेत्रों बिल्हा-चकरभाठा, अम्बिकापुर, कोरबा, मनेन्द्रगढ, पेण्ड्रा, ओडेकेरा, पत्थलगांव, पाली-रतपनुर में भी इसी तरह तालाबों नदियों इत्यादि का साफ-सफाई कार्यक्रम रखा गया है। सफाई अभियान पश्चात 09.30 से 11.00 बजे तक निरंकारी सत्संग कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया है।

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संत निरंकारी मंडल के सचिव जोगिंदर सुखीजा ने जानकारी देते हुए बताया कि यह विशाल अभियान देशभर में 1500 से अधिक स्थानों में एक साथ आयोजित किया गया । इस व्यापक विस्तार के कारण यह प्रयास ऐतिहासिक स्वरूप धारण करेगा, जो जल संरक्षण तथा स्वच्छता के संदेश को समाज के प्रत्येक वर्ग तक प्रभावशाली रूप से पहुँचाएगा।

 

इस पहल का मूल उद्देश्य समाज को यह अनुभूति कराना है कि जल केवल संसाधन नहीं, जीवन का आधार और ईश्वर की अमूल्य देन है, जिसकी रक्षा करना प्रत्येक मानव का नैतिक कर्तव्य है। संत निरंकारी मिशन ने बाबा हरदेव सिंह जी की प्रेरणास्पद शिक्षाओं को आत्मसात करते हुए वर्ष 2023 में संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से ‘प्रोजेक्ट अमृत’ का सूत्रपात किया था। यह पुनीत पहल जल संरक्षण को किसी एक दिवस या अभियान तक सीमित न रखकर उसे जीवनशैली, संस्कार और सेवा-भाव के रूप में अभिव्यक्त करने की प्रेरणा देती है, जहाँ स्वच्छ जल से स्वच्छ मन और स्वच्छ समाज का निर्माण संभव हो सके।

 

नदियों, झीलों, तालाबों, कुओं एवं झरनों जैसे प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन हेतु समर्पित इस जनआंदोलन ने अपने प्रथम तीन चरणों में सेवा, समर्पण और सहभागिता की अद्भुत मिसाल प्रस्तुत की है। इन्हीं उपलब्धियों से प्रेरित होकर इस चरण को और अधिक विस्तृत, संगठित एवं दूरदर्शी दृष्टिकोण के साथ क्रियान्वित किया जा रहा है जिससे समाज के हर वर्ग में प्रकृति के प्रति जागरूकता और सहभागिता की सुदृढ़ चेतना का विस्तार कर सके।
गीतों की मधुर प्रस्तुतियाँ, सामूहिक गान, जागरूकता संगोष्ठियाँ एवं सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से जलजनित रोगों तथा स्वच्छता के महत्व पर जनचेतना को प्रोत्साहित किया जा रहा है। यह पहल यह स्मरण कराती है कि जब मन निर्मल होता है, तभी प्रकृति भी स्वच्छ होती है, और जब सेवा में समर्पण जुड़ जाता है, तब समाज का नव निर्माण होता है।

 

सतगुरु माता जी का संदेश सदैव यही रहा है कि हम इस धरती को आने वाली पीढ़ियों के लिए पहले से अधिक सुंदर, स्वच्छ और संतुलित रूप में संजोकर रखें। ‘स्वच्छ जल, स्वच्छ मन’ अभियान उसी पावन संकल्प का सजीव प्रतीक है, जो मानव को प्रकृति, समाज और आत्मा से जोड़ते हुए करुणा, संतुलन और सौहार्द से परिपूर्ण भविष्य की ओर मार्गदर्शन करता है।

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