बिलासपुर

आवारा कुत्ते के हमले में घायल दो बच्चों का सफल उपचार, सिम्स के डाक्टरों ने किया जटिल पलक सर्जरी

(दिलीप जगवानी) : बिलासपुर।जिले के बिल्हा क्षेत्र अंतर्गत बटोरी गांव में एक दर्दनाक घटना में दो मासूम बच्चों पर आवारा कुत्ते ने हमला कर दिया। इस हमले में दो वर्षीय बालक एवं दो वर्षीय बालिका के चेहरे और आंखों की पलकों पर गंभीर चोटें आईं। घटना के बाद परिजन तत्काल बच्चों को सिम्स लेकर पहुंचे, जहां नेत्र रोग विभाग की टीम ने तुरंत आपातकालीन उपचार शुरू कर दोनों बच्चों की आंखों को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की।

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चिकित्सकों ने बताया कि बच्चों के चेहरे, आंखों एवं पलकों के आसपास गहरे घाव होने के कारण यह मामला “कैटेगरी-3 डॉग बाइट” की श्रेणी में आता है, जिसमें रेबीज संक्रमण का खतरा अत्यधिक रहता है। अस्पताल पहुंचते ही घावों की गहन सफाई की गई तथा तत्काल एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) शुरू की गई। साथ ही संक्रमण को शुरुआती स्तर पर रोकने के लिए रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन (RIG) भी लगाया गया।
आंखों की पलकों के गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होने के कारण बिना देरी किये बच्चों की “अर्जेंट लिड रिपेयर सर्जरी” की गई। सर्जरी के दौरान क्षतिग्रस्त ऊतकों की सूक्ष्मता से मरम्मत कर आंखों की संरचना और दृष्टि को सुरक्षित रखने का प्रयास किया गया। सर्जरी के बाद से दोनों बच्चे चिकित्सकों की निगरानी में हैं तथा उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।

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*टीम मे शामिल डॉक्टर*

इस जटिल उपचार एवं सर्जरी में नेत्र रोग विभाग की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
डॉ. प्रभा सोनवानी, डॉ. संजय चौधरी,डॉ आरती,डॉ. अनिकेत निश्चेतना विभाग से डॉ यशा तिवारी और डॉ द्रोपती सहित अन्य चिकित्सकीय एवं नर्सिंग स्टाफ शामिल रहे।

*एक्सपर्ट व्यू*

सिम्स के अधिष्ठाता *डॉ. रमणेश मूर्ति* ने कहा कि सिम्स अस्पताल गंभीर एवं आपातकालीन मरीजों को त्वरित और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि डॉग बाइट जैसे मामलों में समय पर उपचार अत्यंत आवश्यक होता है, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।

सिम्स के मेडिकल सुपरिटेंडेंट *डॉ. लखन सिंह* ने कहा कि रेबीज एक घातक लेकिन पूर्णतः रोके जाने योग्य बीमारी है। यदि समय रहते एंटी-रेबीज वैक्सीन एवं आवश्यक उपचार दिया जाए तो मरीज को सुरक्षित बचाया जा सकता है। उन्होंने लोगों से घरेलू उपचार, झाड़-फूंक अथवा अंधविश्वास से बचने और वैज्ञानिक उपचार अपनाने की अपील की।

नेत्र रोग विभागाध्यक्ष *डॉ. सुचिता सिंह* ने बताया कि बच्चों की आंखों एवं पलकों पर गंभीर चोट थी, जिसके कारण तत्काल सर्जरी करना जरूरी था। विशेषज्ञ टीम द्वारा सावधानीपूर्वक सर्जरी कर आंखों को सुरक्षित रखने का प्रयास किया गया, जिससे बच्चों की दृष्टि बचाने में सफलता मिली।

*सलाह व सावधानी* : चिकित्सकों ने बताया कि रेबीज संक्रमित कुत्ते, बिल्ली या अन्य जानवर के काटने, खरोंच अथवा लार के संपर्क से फैलने वाली अत्यंत खतरनाक वायरल बीमारी है। बीमारी बढ़ने पर मरीज में पानी से डर लगना, सांस लेने में कठिनाई, मानसिक भ्रम, आक्रामक व्यवहार और लकवा जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दे सकते हैं। विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की कि किसी भी डॉग बाइट की घटना को हल्के में न लें तथा तुरंत चिकित्सा सहायता प्राप्त करें।

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