ज़ोनल मुख्यालय में सुरक्षा बेपटरी! RPF जवान अफसरों के बंगलों में तैनात, तब ट्रेनों और यात्रियों की हिफ़ाज़त कौन करेगा?

(भूपेंद्र सिंह राठौर) : बिलासपुर – दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे का ज़ोनल मुख्यालय जहां महानिरीक्षक सह प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त, सहायक मुख्य सुरक्षा आयुक्त, सहायक सुरक्षा आयुक्त समेत आरपीएफ के तमाम वरिष्ठ अधिकारी निवासरत हैं। लेकिन सवाल ये है कि जब पूरा ज़ोन यहीं से संचालित होता है, तो इसी बिलासपुर में रेलवे की सुरक्षा क्यों हांफ रही है? सूत्रों के मुताबिक,स्टेशन और ट्रेनों में चोरी, छेड़छाड़ और अव्यवस्था की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन आरपीएफ जवान प्लेटफॉर्म या ट्रेनों में नहीं अधिकारियों के बंगलों के बाहर और भीतर ड्यूटी करते नज़र आते हैं।
सूत्र बताते है कि एक-एक अधिकारी के पास 4 से 6 आरपीएफ जवान अलग-अलग शिफ्ट में तैनात हैं, वो भी ऐसी जगहों पर जो न तो संवेदनशील घोषित हैं और न ही किसी विशेष सुरक्षा श्रेणी में आती हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि कई जवानों से पर्सनल असिस्टेंट, घरेलू काम और अन्य गैर-सरकारी कार्य भी कराए जा रहे हैं। नतीजा ये कि स्टेशन की गश्त कम कर दी गई है, कई प्लेटफॉर्म पर घंटों तक एक भी आरपीएफ जवान नज़र नहीं आता।
लेकिन अगर कहीं आरपीएफ जवान दिखेंगे, तो वो बंगलों की चारदीवारी के भीतर ज़रूर मिलेंगे। सूत्र ये भी बताते हैं कि बंगलों में तैनात जवानों की हालत बेहद खराब है। दर्द बहुत है….लेकिन बोलने की हिम्मत कोई नहीं करता। क्योंकि अधिकारियों के साथ रहकर काम करना उनकी मजबूरी बन चुका है। अब सवाल सीधा है क्या आरपीएफ जवानों की पहली जिम्मेदारी रेलवे, यात्रियों और रेलवे संपत्ति की सुरक्षा नहीं है?
क्या ज़ोनल मुख्यालय में बैठे अधिकारी स्टाफ की कमी का हवाला देकर निजी सुरक्षा को प्राथमिकता देते रहेंगे?अब देखना ये होगा कि इस खबर के बाद क्या जवानों को बंगलों की ड्यूटी से राहत मिलती है? और क्या स्टेशन व ट्रेनों की सुरक्षा दोबारा पटरी पर लौट पाती है?




