इंस्टा में आसरा तलाशते लोग खो रहे अपना आश्रय, मोबाइल से बढ़ रही पति-पत्नी के बीच दूरियां

(उषा सोनी) : बिलासपुर। यह कहना गलत नही होगा कि इस दौर मे लोग सोशल मीडिया पर इतने मशरूफ हो गए हैं कि उन्हें अपने परिवारिक रिश्तों का भी ध्यान नहीं रहता। इसका बूरा असर अब पति पत्नी के रिश्ते पर भी पड़ रहा है। महिला थाने में संचालित परिवार परामर्श केंद्र में इन दिनों सोशल मीडिया की वजह से पति पत्नी के बीच दूरियां बनने की शिकायतें बढ़ गई है। यहां हर दिन अलग अलग प्रकरणों के 25 -3o मामले आ रहे हैं। जिसमें कई मामले मोबाइल फोन कॉल्स की वजह से बनती दूरियां और इंस्टाग्राम के जरिए लोगो से मेलजोल बढ़ाकर उनसे नजदीकी बनाना है। इंस्टाग्राम में यूजर्स अपनी प्रोफाइल बनाकर रील, स्टोरीज, और पोस्ट अपलोड कर अनजान लोगों से भी चैट करते हैं। नए लोगो को फालो करने के बीच वे अपने परिवारिक जिम्मेदारियों को भी भूल जाते हैं और उनका अपना घर बिखर जाता है।
बसा बसाया घर छोड़, जोड़ते अनजानो से रिश्ता – परिवार परामर्श केंद्र की काउंसलर डॉ. नीता श्रीवास्तव और आशा सिंह ने बताया कि यूजर्स इंस्टा में इस कदर डूब जाते हैं कि उन्हें पति – पत्नी और बच्चे और घर की जिम्मेदारियों का ध्यान ही नहीं रहता। इसकी वजह से घर में आए दिन विवाद की स्थिति बन जाती है और मामला महिला थाना तक पहंुच जाता है। यही नहीं लोग अपना बसा बसाया घर छोड़कर अनजान लोगों के साथ रिश्ता जोड़ लेते हैं। महिला थाने में घरेलू हिंसा, शराब मारपीट दहेज प्रथा जैसे केसेस आते हैं इनमें से ज्यादातार मामलों को सुलझाकर परिवारों को एक किया जाता है। जबकि दो से तीन महिनों में मोबाइल से जुडें केस ऐसा ही आ रहा है जिसमें इंस्टाग्राम के जरिए पति पत्नी के रिश्ते टूट रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक पांच साल पहले महिला थाने में जहां ऐसे 10-15 केस आते थे अब बढ़कर हर दिन 25-30 हो गये है। दावा किया जा रहा है कि अभी ज्यादतार मोबाइल से जुड़े मामले आ रहे हैं। महिला और पुरूष दोनो की एक ही शिकायतें रहती है….. रात रात भर मोबाइल में बिजी रहना..। छत पर , कमरे से बाहर और अन्य किसी जगहों पर जाकर छिपकर बातें करने कि शिकायतें कि जा रही है।
जीवन और परिवार को बचाना हमारा प्रयास – काउंसलरों का कहना है कि वहीं महिला थाना में संचालित परिवार परामर्श केंद्र एक ऐसी जगह है जहां हम लोगो के जीवन और परिवार को बचाने का प्रयास करते हैं। परिवार या पति- पत्नी बच्चे अलग ना हो यह हमारा मेने मोटो है। कई बार कांउसिलिंग को बढ़ाई जाती है ताकि उन्हें जुड़ने का पर्याप्त समा’ मिल जाए।




