रेत घाटों की ऑनलाइन नीलामी, कम आवेदन से 91 लाख राजस्व नुकसान का अनुमान

(भूपेंद्र सिंह राठौर) : बिलासपुर जिले में रेत घाटों की ऑनलाइन नीलामी का दौर जारी है। चार घाटों का ठेका निकल चुका है, लेकिन इनमें केवल एक ही घाट स्थानीय बोलीदार के हिस्से आया है। अब उदईबंद के दो बड़े घाटों की नीलामी शुक्रवार को प्रार्थना सभा भवन में की जाएगी।
बिलासपुर में पहली बार रेत घाटों की ऑनलाइन नीलामी हो रही है। अब तक चार घाट जरगा, कुकुर्दीकला-2, निरतू और लमेर नीलाम हो चुके हैं। इनमें से सिर्फ लमेर घाट ही बिलासपुर जिले के बोलीदार रविकुमार मधुकर के हिस्से आया है, जबकि बाकी तीन घाट दूसरे जिलों के बोलीदारों ने हासिल किए हैं।
शुक्रवार को उदईबंद के दो प्रमुख घाट उदईबंद-2 और उदईबंद-3 की नीलामी प्रार्थना सभा भवन में की जाएगी। ये दोनों घाट आकार में बड़े हैं उदईबंद-2: 11 हेक्टेयर उदईबंद-3: 13 हेक्टेयर कुल 24 हेक्टेयर का बड़ा क्षेत्र, जो इस सीजन की सबसे विशाल नीलामी मानी जा रही है।
जरगा घाट पेंड्रा की नेहा शिवदासानी को, कुकुर्दीकला-2 घाट धमतरी की मालती, निरतू घाट रायपुर के अमित यादव, और लमेर घाट गतौरा निवासी रविकुमार मधुकर को मिला है। उदईबंद के दोनों घाटों की नीलामी के बाद जिले में कुल 6 रेत घाट ठेके पर दे दिए जाएंगे।
ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू होने के बाद आवेदन संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। जरगा, कुकुर्दीकला-2 और निरतू इन तीन घाटों में कुल 733 आवेदन आए, जिससे शासन को 73 लाख रुपए की आय हुई। जबकि दो साल पहले की ऑफलाइन नीलामी में 1640 आवेदन आए थे और शासन को 1 करोड़ 64 लाख रुपए मिले थे। इस तुलना में विभाग को करीब 91 लाख रुपए की राजस्व हानि मानी जा रही है।
पुरानी ऑफलाइन प्रक्रिया में आरोप लगते थे कि बड़े रसूखदार अपने लोगों के नाम से आवेदन भरवाते थे, जबकि घाट कोई और चलाता था। सिंडिकेट बनाकर लोडिंग चार्ज बढ़ाने और बाजार में रेत महंगी होने की शिकायतें भी आम थीं। लेकिन ऑनलाइन नीलामी ने तस्वीर बदली पारदर्शिता बढ़ी, पर बोलीदार कम हो गए और आवेदन शुल्क से मिलने वाला राजस्व भी घट गया।
अब सभी की नजरें उदईबंद के दो बड़े घाटों की नीलामी पर टिकी हैं। प्रशासन तैयार है, और आज यह साफ होगा कि ये घाट किसके हिस्से आते हैं। रेत घाटों की ऑनलाइन नीलामी में पारदर्शिता तो बढ़ी है, लेकिन कम आवेदन से राजस्व पर असर साफ दिखाई दे रहा है।




