न्यू होराइजन डेंटल कॉलेज में जटिल मैन्डिबुलर नर्व लैटरलाइजेशन सर्जरी सफल, इम्प्लांट उपचार में बड़ी उपलब्धि

(जयेन्द्र गोले) : बिलासपुर – दंत चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए न्यू होराइजन डेंटल कॉलेज एवं रिसर्च इंस्टिट्यूट में मैन्डिबुलर नर्व लैटरलाइजेशन जैसी जटिल सर्जिकल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। यह तकनीक उन मरीजों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, जिनके निचले जबड़े की हड्डी की गहराई डेंटल इम्प्लांट के लिए पर्याप्त नहीं होती।
डेंटल इम्प्लांट एक टाइटेनियम स्क्रू के आकार का उपकरण होता है, जिसे जबड़े की हड्डी में कम से कम 8 मिलीमीटर की गहराई तक स्थापित करना आवश्यक होता है। संबंधित मरीज के मामले में हड्डी की ऊंचाई कम थी और मैन्डिबुलर नर्व कैनाल ठीक इम्प्लांट साइट के नीचे स्थित थी, जिससे सामान्य प्रक्रिया जोखिमपूर्ण थी।
बाईट – प्रियंका अग्रवाल (एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर)
ऐसी स्थिति में विशेषज्ञों ने मैन्डिबुलर नर्व लैटरलाइजेशन तकनीक अपनाई। इस प्रक्रिया में नर्व कैनाल के ऊपर की हड्डी को सावधानीपूर्वक हटाकर नर्व को अस्थायी रूप से एक ओर सुरक्षित किया गया, इम्प्लांट स्थापित किया गया और फिर नर्व को पुनः उसके स्थान पर स्थापित कर बोन ग्राफ्ट व प्लेट-स्क्रू की सहायता से हड्डी को पुनर्स्थापित किया गया।
बाईट – प्रो. डॉ.अभिषेक शर्मा(प्रोस्थोडॉन्टिक्स विभाग)
यह संवेदनशील सर्जरी प्रोस्थोडॉन्टिक्स विभाग के पीजी छात्र डॉ. शुभम व विभागाध्यक्ष डॉ. तुषार व प्रो. डॉ. अभिषेक शर्मा और प्रो. डॉ. गौरव त्रिपाठी के मार्गदर्शन में की। वहीं रेडियोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. गिरिधर एस. नायडू, प्रो. रमनपाल सिंह मक्कड़ और डॉ. स्वतंत्र श्रीवास्तव ने अत्याधुनिक CBCT मशीन के माध्यम से सटीक हड्डी और नर्व कैनाल का मूल्यांकन कर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बाईट – डॉ. स्वतंत्र श्रीवास्तव (रेडियोलॉजी विभाग)
कॉलेज प्रबंधन प्रेसिडेंट प्रकाश दावडा, सेक्रेटरी अशोक अग्रवाल, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रियंका अग्रवाल और प्रगति मिरानी के प्रोत्साहन और आधुनिक सुविधाओं की उपलब्धता से यह जटिल केस सफलतापूर्वक संपन्न हो सका।यह उपलब्धि न केवल संस्थान के लिए गौरव का विषय है, बल्कि उन्नत दंत चिकित्सा तकनीकों के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम भी मानी जा रही है।




