मोपका जंगल तबाह, डीएफओ की भूमिका पर गंभीर सवाल

(भूपेंद्र सिंह राठौर) : बिलासपुर जिले के मोपका जंगल में अवैध खनन और अंधाधुंध पेड़ कटाई का मामला अब सीधे वन विभाग और डीएफओ की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। जिला मुख्यालय से चंद किलोमीटर दूर जंगल उजड़ता रहा, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौन रहे।
जिले में कई जगहों पर अवैध कटाई चल रही है। मोपका के खसरा नंबर 2500, 53, 54 और 55 में फैली करीब 80 एकड़ वन भूमि बीते कई वर्षों से अवैध मिट्टी खनन और सागौन जैसे कीमती पेड़ों की कटाई का शिकार हो रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सब कुछ वन मंडल कार्यालय की जानकारी के बावजूद चलता रहा। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मोपका बीट नंबर ए और बी में लंबे समय से कोई बीट गार्ड तैनात नहीं है। सूत्रों का कहना है कि इस गंभीर लापरवाही की जानकारी डीएफओ कार्यालय को बार-बार दी गई, लेकिन न निरीक्षण हुआ, न कोई ठोस कार्रवाई।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2013-14 में यहां हजारों सागौन के पौधे लगाए गए थे, लेकिन पिछले दो वर्षों से गार्डों का अनुबंध समाप्त होने के बाद पूरे क्षेत्र को असुरक्षित छोड़ दिया गया। सूत्रों के मुताबिक जंगल से लगी जमीनों पर संचालित ईंट भट्ठों तक अस्थायी रास्ते बनाकर जेसीबी से रोजाना बड़े पैमाने पर मिट्टी खुदाई की जा रही है। सूत्रों कि माने तो डीएफओ कार्यालय में मिलने पहुंचने वालों को अक्सर यह कहकर लौटा दिया जाता है कि “साहब मीटिंग में हैं” या “व्यस्त हैं”, जबकि कर्मचारी उनके चेंबर के सामने मोबाइल में व्यस्त नजर आते हैं। आरोप यहां तक हैं कि डीएफओ की उदासीनता के कारण बिलासपुर जिले के अलग-अलग इलाकों में पेड़ कटाई और वन अपराध लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अब सवाल सिर्फ मोपका के जंगल का नहीं, बल्कि पूरे वन मंडल की निगरानी व्यवस्था का है। क्या उच्च अधिकारी इस मामले में डीएफओ की भूमिका की जांच करेंगे? या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?




