माइलेज भत्ता बढ़ाने की मांग को लेकर, लोको पायलट और गार्ड 48 घंटे के उपवास पर

(भूपेंद्र सिंह राठौर/मयंक सिंह) : बिलासपुर में रनिंग स्टाफ—यानी लोको पायलट और गार्ड—ने अपने कई पुराने मांगों को लेकर 48 घंटे के उपवास का निर्णय लिया है। AILRSA के आह्वान पर मंगलवार से GM कार्यालय सहित सभी क्रू लॉबियों के सामने धरना शुरू हो गया है। स्टाफ का कहना है कि वे दिन-रात ट्रेनें चलाकर देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाते हैं, लेकिन उनके अधिकारों और सुविधाओं की लगातार अनदेखी की जा रही है।
बिलासपुर ज़ोन में रनिंग स्टाफ पिछले कई महीनों से अपने मूलभूत अधिकारों को लेकर संघर्ष कर रहा है। 2024 में जब DA 50% हुआ, तो सभी भत्तों में 25% वृद्धि का नियम लागू हुआ—लेकिन रनिंग स्टाफ को मिलने वाला माइलेज भत्ता अब तक नहीं बढ़ा।रनिंग स्टाफ का कहना है कि माइलेज भत्ता TA पर आधारित होता है, और TA में 25% बढ़ोतरी होने के बाद भी रेलवे इसे लागू नहीं कर रही है। रेलवे बोर्ड के साथ बातचीत में अधिकारी इस मांग को ‘जेनुइन’ बताते हैं, लेकिन फाइनेंस विभाग का हवाला देकर बार-बार फैसला टाल दिया जा रहा है। इसी के विरोध में मंगलवार पूरे देश में क्रू लॉबियों और ट्रेनिंग सेंटर्स में रनिंग स्टाफ ने उपवास शुरू किया है। ड्यूटी पर मौजूद पायलट और गार्ड भी बिना खाना-पानी के अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
स्टाफ का कहना है कि बिलासपुर ज़ोन में 4541 पद खाली हैं, जबकि कार्य सिर्फ 7500 लोग कर रहे हैं।
सैंक्शन स्ट्रेंथ 12000 होने के बाद भी नई भर्ती को जॉइनिंग नहीं दी जा रही है।ओवरटाइम बढ़ रहा है, लेकिन आराम कम। महीने में जहां 4 रेस्ट मिलने चाहिए वहां मुश्किल से दो या ढाई रेस्ट मिल पाते हैं।
लगातार दो से ज़्यादा नाइट ड्यूटी लेने से सेफ्टी पर असर पड़ रहा है।
रनिंग स्टाफ का कहना है हम देश की सबसे महत्वपूर्ण सेवा निभा रहे हैं, लेकिन हमारी सुरक्षा, आराम और अधिकारों की अनदेखी हो रही है। अगर स्टाफ सुरक्षित रहेगा तभी रेलवे सुरक्षित रहेगी। फिलहाल धरना जारी है और स्टाफ ने साफ कहा है कि जब तक उनकी वास्तविक मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। रेलवे प्रशासन की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।




