बिलासपुर

मानव शरीर की पड़ताल करता हैं मास नाटक, आर्टिस्ट ज्योति डोगरा ने कहा….

(दिलीप जगवानी) : बिलासपुर – मुंबई की प्रसिद्ध थियेटर आर्टिस्ट ज्योति डोगरा अपने नवीनतम नाटक मास को लेकर चर्चा मे है। इंसान का अपनी देह पर अधिकार और उसके बनावट को लेकर समाज का नजरिया। इस दौर मे भी चुभता है।उनका बिलासपुर आना महत्त्व रखता परन्तु खलने वाली बात है कि शरीर की पड़ताल करने वाली उनकी प्रस्तुति देखने से स्थानीय कला प्रेमी वंचित हुए।

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खैर उनका यहां छोटा सा इंटरव्यू आपसे साझा कर रहे जिसमें ज्योति डोगरा कह रही मास पर बातचीत होना चाहिए। यह हर एक का निजी मामला है और अपने शरीर को लेकर व्यक्ति उम्र के सभी पड़ाव मे आक्षेप का शिकार होता है। ज्यादातर शरीर की बनावट और इसमे किसी विकृति वह चाहे जन्म से क्यों न हो हीनतावश कुढ़ते रहते है। नतीजा भोजन नियंत्रण और चेहरे पर मेकअप का सहारा आम हो चुका है।

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अनुभवी रंगकर्मी ज्योति डोगरा बताती है कि मास की परिकल्पना समाज से उपजी वह शर्मिंदगी है जो असल मे नहीं होना चाहिए। क्योंकि यह बेहद निजी है, और निजी पर दूसरे का अधिकार नहीं होता। वो कहती है समाज अपने अनुसार दूसरों का शरीर चाहता है। इससे उपजी परेशानी पर खुलकर बात करना चाहिए।

वो नाटक के जरिए चर्चा करती है ना कि संदेश दे रही । बातचीत मे कहती है देह से परे मनोभाव और व्यक्ति को घुटन से बाहर निकालने की फिक्र के लिए नाटक मास प्रेरित करता है, दो घंटे का एकल अभिनय नाटक मास के संवाद रह रह कर चीखते है।

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