बिलासपुर

कानन पेंडारी का रेस्क्यू सेंटर बदहाल, घायल वन्य प्राणियों की जान जोखिम में….

(भूपेंद्र सिंह राठौर) : बिलासपुर – कानन पेंडारी चिड़ियाघर परिसर में बना रेस्क्यू सेंटर इस वक्त खुद ही किसी रेस्क्यू की गुहार लगा रहा है। संभाग का यह एकमात्र रेस्क्यू सेंटर, अब सिर्फ कागज़ों तक सीमित होकर रह गया है। न केज न ड्रेसिंग रूम और न ही घायल वन्य प्राणियों के इलाज की कोई ठोस व्यवस्था।

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रेस्क्यू सेंटर का मकसद होता है घायल, बीमार या संघर्ष में फंसे वन्य प्राणियों का इलाज और पुनर्वास। लेकिन कानन पेंडारी में न तो आधुनिक केज हैं, न ही बुनियादी मेडिकल सुविधाएं। यहां तक कि एक ड्रेसिंग टेबल तक की व्यवस्था नहीं है। नियमानुसार रेस्क्यू सेंटर में कम से कम तीन तरह के केज एक बंद, एक खुला और एक ऑब्ज़र्वेशन केज होने चाहिए। लेकिन हकीकत ये है कि मांसाहारी प्राणियों के लिए एक भी केज नहीं है।

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इस लापरवाही का खामियाज़ा भुगतते हैं हमारे जंगलों के घायल मेहमान। रेस्क्यू के बाद इलाज की बजाय इन्हें रायपुर जंगल सफारी रेफर करना पड़ता है, जिससे उनकी जान पर बन आती है। जू अधीक्षक भोपाल सिंह राजपूत मानते हैं कि केज निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा गया है, और एक केज का निर्माण शुरू भी हुआ था लेकिन वो अब तक अधूरा है। बजट की मांग फिर से की जा रही है। कानन पेंडारी का यह केंद्र सिर्फ बिलासपुर नहीं, बल्कि पूरे संभाग जैसे कोरबा, मरवाही, रायगढ़ और कटघोरा के जंगलों से लाए गए वन्य प्राणियों का एकमात्र सहारा है। जब जू प्रशासन भी इस स्थिति से वाकिफ है, अगर रेस्क्यू सेंटर को दुरुस्त किया जाए, तो न सिर्फ इन जीवों की जान बचाई जा सकती है, बल्कि उन्हें फिर से सुरक्षित जंगल में छोड़ा भी जा सकता है।

 

 

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