बिलासपुर

भेड़िए देने को तैयार जोधपुर-पुणे, लेकिन कानन में न केज है न बजट

स्लग: भेड़िया भेजने को तैयार, जगह नहीं कानन में

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(भूपेंद्र सिंह राठौर) : बिलासपुर – कानन पेंडारी जू में वन्यप्राणियों के लिए जगह की कमी एक बार फिर सुर्खियों में है। जोधपुर और पुणे जैसे बड़े चिड़ियाघर मादा टाइगर के बदले नर और मादा भेड़िया भेजने को तैयार हैं, लेकिन कानन प्रबंधन ने अब तक हामी नहीं भरी है। वजह भेड़ियों के लिए केज ही मौजूद नहीं है।

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देशभर के चिड़ियाघरों में वन्यजीवों के अदान-प्रदान की एक निर्धारित प्रक्रिया है। उसी के तहत जोधपुर और पुणे जू ने बिलासपुर स्थित कानन पेंडारी जू से एक मादा रॉयल बंगाल टाइगर की मांग की है। इसके बदले वे नर और मादा भेड़िया देने को तैयार हैं। लेकिन कानन पेंडारी में भेड़िया लाने की प्रक्रिया फिलहाल रुकी हुई है।

जानकारी के मुताबिक कानन ने मादा टाइगर देने की सहमति तो दे दी है, लेकिन भेड़ियों को लाने पर कोई आधिकारिक निर्णय नहीं हुआ है। वजह साफ है जू में भेड़िया रखने के लिए न तो केज है और न ही उसके निर्माण का बजट। सीजेडए यानी केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण और एनटीसीए के अनुसार, देश के सभी चिड़ियाघरों को वन्यजीवों की संख्या के आधार पर संतुलन बनाए रखना होता है। कानन पेंडारी जू इस प्रक्रिया में शामिल तो है, लेकिन भेड़ियों की अब तक कोई प्रदर्शनी नहीं रही है।

कुछ ही दिन पहले कानन ने ग्वालियर जू से एक व्हाइट टाइगर की मांग की थी, जिसके बदले चौसिंघा और भालू दिए गए। यानी कानन अदान-प्रदान की प्रक्रिया को अपनाता जरूर है, लेकिन अधूरी तैयारियों के साथ।

कानन पेंडारी जू में रॉयल बंगाल टाइगर और व्हाइट टाइगर देखने बड़ी संख्या में सैलानी पहुंचते हैं, लेकिन नई प्रजातियों को लाने के लिए न तो जगह है और न बजट। अब देखना होगा कि क्या वन विभाग इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाता है या फिर भेड़िए सिर्फ प्रस्तावों तक ही सीमित रहेंगे।

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