अचानकमार टाइगर रिजर्व में घायल बाघ लापता, पीसीसीएफ निरीक्षण के बाद भी सस्पेंस बरकरार

(भूपेंद्र सिंह राठौर) : बिलासपुर – अचानकमार टाइगर रिजर्व में बाघ की मौत की घटना ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर आपसी संघर्ष में बाघ की मौत हुई, दूसरी ओर पीसीसीएफ के निरीक्षण के बाद भी न तो कोई नई जानकारी सामने आई और न ही अधिकारी मीडिया के सवालों का जवाब देने को तैयार दिखे।
घटना 25 जनवरी की है, जब अचानकमार टाइगर रिजर्व के अचानकमार परिक्षेत्र अंतर्गत सारसडोल परिवृत्त के कुडेरापानी कक्ष क्रमांक 120 आरएफ में पेट्रोलिंग के दौरान एक करीब दो वर्षीय नर बाघ मृत अवस्था में पाया गया। मौके पर आपसी संघर्ष के स्पष्ट निशान मिले, जिनमें टूटे पौधे, खरोच और बाल शामिल थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बाघ की मौत का कारण दो बाघों के बीच हुआ हिंसक संघर्ष बताया गया, जिसमें मृत बाघ की गर्दन की हड्डी टूट गई थी। इसके साथ ही गर्दन पर दूसरे बाघ के दांतों के निशान भी पाए गए।
घटना के बाद मंगलवार को पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ अरुण पांडेय ने जंगल के भीतर पहुंचकर सुबह से शाम तक निरीक्षण किया। डीएफओ यू.आर. गणेश समेत तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, लेकिन निरीक्षण के बावजूद किसी ठोस निष्कर्ष या नई जानकारी का खुलासा नहीं किया गया। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि घटना में घायल बताए जा रहे दो अन्य बाघ अब तक लापता हैं।
आशंका जताई जा रही है कि वे शिकार का शिकार भी हो सकते हैं, लेकिन वन विभाग इस पर खुलकर कुछ भी कहने से बचता नजर आया। मीडिया द्वारा जानकारी मांगे जाने पर अधिकारी कैमरे से दूरी बनाते रहे। न बाइट दी गई और न ही घायल बाघों की स्थिति पर स्पष्ट बयान सामने आया। पीसीसीएफ स्तर के निरीक्षण के बाद भी सूचना का अभाव वन्यजीव सुरक्षा और मॉनिटरिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।




