खनिजों का अवैध खनन धड़ल्ले से जारी….कार्रवाई सिर्फ कागज़ों में?

(भूपेंद्र सिंह राठौर) : बिलासपुर में खनिजों के अवैध उत्खनन और परिवहन पर कार्रवाई का दावा तो बड़ा है… लेकिन हकीकत कुछ और ही तस्वीर दिखाती है। खनिज विभाग की हालिया कार्रवाई को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं कि ये काम ‘कागज़ों में सख्ती’ ज्यादा और ‘मैदान में दिखावा’ ज़्यादा तो नहीं?
कलेक्टर और उप संचालक के निर्देशों पर खनिज विभाग ने 1 से 7 दिसंबर तक कई जगहों पर कार्रवाई की मटियारी, लमेर, आमागोहान और निरतु में रेत व मुरुम ढोते 4 हाइवा, 4 ट्रैक्टर–ट्रॉली और 1 चैन माउंटेन जब्त करने का दावा किया गया है। थानों की सुपुर्दगी… यथा स्थान सील… और रैंप काटने जैसी कार्रवाई भी सूची में दर्ज है।
लेकिन बड़ा सवाल क्या वाकई इससे अवैध खनन रुका? या सिर्फ दिखावे की खानापूर्ति की गई?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई सिर्फ छोटे वाहनों पर होती है… जबकि बड़े स्तर पर होने वाला लाखों का अवैध खेल बरकरार है। वही पुराने रूट… वही रेत के ठेकेदार… और वही रात-बिरात चलने वाली हाइवा की लाइनें—सब कुछ ज्यों का त्यों जारी है।
एक ट्रैक्टर पकड़ा जाता है, दो नए निकल जाते हैं।
एक रैंप काटा जाता है, अगले ही दिन फिर बन जाता है। और चैन माउंटेन जब्त होने की खबर तो जरूर आती है, लेकिन खदानें वैसी ही चलती रहती हैं।
जमीनी हकीकत ये है कि विभाग की कार्रवाई सिर्फ प्रेस नोट में कड़ी दिखती है… जमीन पर नहीं।अगर कार्रवाई इतनी ही प्रभावी है, तो अवैध रेत घाटों की कतारें कब खत्म होंगी? कब रुकेगा लाखों का काला कारोबार? और कब जिम्मेदारों पर बड़ी कार्रवाई होगी?
अब देखने वाली बात होगी कि विभाग इस “दिखावे की सख्ती” से आगे बढ़कर वास्तविक कार्रवाई कब करेगा… वरना अवैध खनन का खेल यूं ही चलता रहेगा वाहन बदलेंगे, तारीख बदलेगी… लेकिन कहानी वही रहेगी।




